फर्जी पते और नकली दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने के मामले में मध्यप्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एमपी एटीएस) ने पांच अफगानी नागरिकों को न्यायालय में पेश किया। रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद अदालत के आदेश पर सभी आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।
गौरतलब है कि अफगानिस्तान निवासी सोहबत खान वर्ष 2015 में जबलपुर आया था और निकाह के बाद यहीं बस गया। उसने फर्जी पते के आधार पर पासपोर्ट बनवाया था। सोशल मीडिया पर एके-47 राइफल के साथ तस्वीर पोस्ट करने के बाद वह एटीएस के रडार पर आया और अगस्त 2025 में गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि वह एक गिरोह संचालित कर रहा था, जो देश के विभिन्न हिस्सों में रह रहे अफगानी नागरिकों के लिए जबलपुर से फर्जी पते और दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाता था।
एटीएस ने इस मामले में गिरोह के अन्य सदस्यों दिनेश गर्ग, महेंद्र कुमार सुखदान और चंदन सिंह को भी गिरफ्तार किया था। इसके अलावा दो अफगानी नागरिकों को कोलकाता से पकड़ा गया था, जिन्होंने फर्जी पासपोर्ट बनवाने के लिए ढाई-ढाई लाख रुपये दिए थे।
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जांच के दौरान एटीएस ने जिया उल रहमान, सुल्तान मोहम्मद, रजा खान, सैयद मोहम्मद और जफर खान को कोलकाता से गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि सभी आरोपी वर्ष 2018-19 में काबुल (अफगानिस्तान) से दिल्ली होते हुए कोलकाता पहुंचे थे। सुल्तान मोहम्मद मेडिकल वीजा पर भारत आया था, जबकि अन्य चार अवैध रूप से देश में दाखिल हुए थे।
आरोपियों ने पासपोर्ट आवेदन में जबलपुर के 300 मोतीनाला तालाब सदर, 410 उपरैनगंज और 870 छोटी ओमती जैसे फर्जी पते दर्ज कराए, जिनका वास्तविक अस्तित्व नहीं पाया गया। सत्यापन प्रक्रिया पूरी कराकर पांच में से चार पासपोर्ट जारी भी हो गए थे। इनमें से तीन पासपोर्ट एटीएस ने जब्त कर लिए हैं, जबकि एक गलत पते के कारण पासपोर्ट कार्यालय लौट गया था।
एटीएस ने आरोपियों को तीन दिन की पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की। रिमांड समाप्त होने पर बुधवार को सभी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। मामले में आगे की जांच जारी है।