गुना जिले में राजस्थान की सीमा से सटे घने जंगलों के बीच घनी पहाड़ी पर विराजी हैं मां निहालदेवी। 10-20 साल पहले तक इतना घना जंगल था कि लोगों का यहां से निकलना तक मुहाल था। किंवदंती यह है कि लगभग 300 साल पहले एक डाकू निहालसिंह को इस पहाड़ी पर मां निहालदेवी की मूर्ति गढ़ी हुई मिली थी। मां निहालदेवी का प्रताप ऐसा कि मन्नत मांगते ही फंसी हुई बैलगाड़ी का पहिया भी निकल जाता था।
प्राचीन प्रसिद्ध निहाल देवी माता मंदिर पर नवरात्रि की सप्तमी पर हजारों श्रद्धालुओं ने पहुंच कर माता के दर्शन किए। बमोरी विधानसभा क्षेत्र के प्रसिद्ध निहाल देवी माता मंदिर पर नवरात्र में 9 दिन मेले का आयोजन किया जाता है बुधवार को नवरात्रि की सात तारीख होने की वजह से हजारों श्रद्धालुओं ने निहाल देवी माता मंदिर पहुंचकर मां निहाल देवी मंदिर पर माथा टेका और प्रसाद चढ़ाया। मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि अन्य प्रदेशों से भी माता के दर्शन करने के लिए श्रद्धालु निहाल देवी माता मंदिर पहुंचते हैं और दर्शन करते हैं। नजदीकी राज्य राजस्थान से श्रद्धालुओं की अधिक तादाद प्रतिवर्ष देखने को मिलती है। सुरक्षा की दृष्टि से भारी पुलिस तैनात रहता है।
आपको बता दें नवरात्रि पर्व पर देश के अलग-अलग हिस्से में स्थित देवी माता के मंदिरों का माहौल कुछ अलग ही होता है, क्योंकि नवरात्रि पर्व के व्रत करने के साथ साथ श्रद्धालु मंदिरों में दर्शन करने के लिए भी जाते हैं। ऐसे में गुना जिले में स्थित निहाल देवी माता का प्राचीन मंदिर भी है, जिसमें हजारों की संख्या में भक्त दर्शन लाभ ले रहे हैं।