दौर भले ही आर्टिफिशियल सामग्री और चमक-धमक का हो, लेकिन भाई-बहन के प्रेम के पवित्र पर्व रक्षाबंधन को लेकर राखी के मामले में बहनों की सोच कुछ अलग है। पिछले कुछ वर्षों तक चांदी और सोने की राखियों की बिक्री बढ़ने के बाद इस बार बाजार का माहौल बदला-बदला सा नजर आ रहा है। इस बार अधिकांश महिलाएं चांदी की राखियों की बजाय रेशम के धागे को ही प्राथमिकता दे रही हैं। ज्वेलर्स व्यवसाय से जुड़े व्यापारी बताते हैं कि जब चांदी की राखियां पहली बार प्रचलन में आई थीं, तो उन्हें खरीदने के लिए लोगों में काफी उत्साह था। लेकिन अब, परम्परागत पर्व को मनाने के लिए बहनें फिर से परम्परागत रेशम के धागों को ही पसंद कर रही हैं। इसकी एक वजह चांदी और सोने के आसमान छू रहे दाम भी हो सकते हैं। यही कारण है कि एक बार फिर रेशम के धागों से बनी राखियों की बिक्री में तेजी आई है।