शहर की ऐतिहासिक भोजशाला सहित परिसर में दोनों समाजों के धार्मिक आयोजन शुक्रवार को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुए। भोजशाला में हिंदू समाज ने पूजा-अर्चना की। साथ ही खसरा नंबर 612 पर मुस्लिम समाज ने नमाज पढ़ी। इधर, शुक्रवार होने के चलते प्रशासन सुबह से ही अलर्ट रहा, करीब एक हजार जवानों को सुरक्षा की दुष्टि से तैनात किया गया था। सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए प्रशासन ने दोनों पक्षों के लिए अलग-अलग प्रवेश व निकास मार्ग निर्धारित किए थे।
दरअसल, पिछले शुक्रवार को आवागमन के दौरान पैदा हुए गतिरोध और विवाद के आरोपों को देखते हुए धार जिला प्रशासन ने व्यवस्थाओं में सुधार किया। कलेक्टर राजीव रंजन मीणा और पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा ने सुबह भोजशाला परिसर, नमाज स्थल और सभी पहुंच मार्गों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि टकराव टालने के लिए दोनों पक्षों के आने-जाने का समय और रास्ता पूरी तरह अलग रखा गया है, जो सुबह से शाम तक रहा।
त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई
संवेदनशील स्थिति को देखते हुए भोजशाला परिसर के बाहर त्रिस्तरीय मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। सुरक्षा में किसी भी प्रकार की चूक न हो, इसके लिए मोबाइल सर्विलांस व्हीकल (एमएसवी) और 180-डिग्री कैमरों की मदद से चप्पे-चप्पे पर पैनी नजर रखी गई।
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हिंदू संगठनों ने किया था आह्वान
भोजशाला को लेकर मुस्लिम पक्ष की ओर से दायर पांच याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश संजय कुमार और संजीव सचदेवा की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई प्रस्तावित है। हिंदू संगठनों के आह्वान पर भोजशाला में हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। शुक्रवार को बड़ी संख्या में लोगों हिंदू संगठनों के आह्वान पर भोजशाला पहुंचे, हनुमान चालीसा के पाठ के दौरान शंख बजाकर जयघोष भी किया गया। भोज उत्सव समिति के विश्वास पांडे ने बताया कि हम प्रत्येक शुक्रवार को हनुमान चालीसा का पाठ करते आए हैं और करते रहेंगे। हमें सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा का जो अधिकार हिंदू समाज को मिला है, उसी के तहत हम पूजा-पाठ करते है। भोजशाला हिंदूओं का मंदिर है। मां सरस्वती का स्थान है। कलेक्टर राजीव रंजन मीणा ने कहा कि शीर्ष न्यायालय के निर्देशानुसार यहां जो व्यवस्थाएं की गई हैं, उन आदेशों का पालन हुआ है। दोनों समुदायों के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकासी की व्यवस्था रखी थी।