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Burhanpur News: 150 फीट गहरी खाई पार कर गंदा पानी पीने को मजबूर आदिवासी, नल-जल योजना के दावों की खुली पोल

Wed, 03 Jun 2026 10:07 AM IST
बुरहानपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बुरहानपुर

बुरहानपुर जिले में नल-जल योजना के सफल क्रियान्वयन के दावों के बीच एक बार फिर ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सरकारी व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम पंचायत मालवीर के अंतर्गत आने वाले गांव जामठी के पलस पानी और रामलाल आदिवासी फलिया के करीब 50 परिवारों के 200 से अधिक लोग आज भी स्वच्छ पेयजल के लिए जान जोखिम में डालने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों को पानी भरने के लिए लगभग दो किलोमीटर दूर और करीब 150 फीट गहरी पहाड़ियों के खतरनाक रास्तों से नीचे उतरना पड़ता है। रास्ता इतना जोखिमभरा है कि कई लोग फिसलकर घायल भी हो चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि इतनी कठिनाई झेलने के बाद भी लोगों को स्वच्छ पानी नहीं मिल रहा। ग्रामीण छोटी नदी और झिर से निकलने वाला मटमैला एवं बदबूदार पानी पीने को मजबूर हैं। यही पानी पीने के साथ-साथ नहाने और कपड़े धोने में भी उपयोग किया जा रहा है, जिससे जलजनित बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है।

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ग्रामीण रेलसिंग का कहना है कि उन्होंने इस समस्या की जानकारी कई बार ग्राम पंचायत मालवीर के सरपंच और सचिव को दी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। रूपली बाई ने बताया कि बरसों से यही पानी पीते आ रहे हैं, लेकिन हमारी कोई सुनवाई नहीं होती है। गंदा पानी पीने को मजबूर है। सुरमीबाई ग्रामीण महिला का कहना है कि सरपंच-सचिव को शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं होती है, इसी पानी को पीना पड़ता, नहाना पड़ता है, और कपड़े धोने पड़ते हैं। हमारी तो मजबूरी है।उन्होंने कहा कि हैडपंप लगा दो, कुआं खुदवा दो, या नल जल योजना का पानी हमारे घरों तक पहुंचा दो।

वहीं कुछ दिनों पहले धुलकोट क्षेत्र से भी ऐसी ही तस्वीरें सामने आई थीं, जहां लोग गहरे गड्ढों में उतरकर पानी भरते दिखाई दिए थे। विडंबना यह है कि नल-जल योजना में उत्कृष्ट कार्य के लिए जिले को सम्मान और अधिकारियों को पुरस्कार मिल चुके हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की सच्चाई उजागर कर रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि नल-जल योजना वास्तव में घर-घर तक पहुंच चुकी है, तो फिर पलस पानी और रामलाल फलिया के आदिवासी परिवार आज भी गंदा पानी पीने और मौत जैसे रास्तों से गुजरने को क्यों मजबूर हैं? अब निगाहें शासन और प्रशासन पर टिकी हैं कि आखिर कब इन उपेक्षित फलियाओं तक स्वच्छ पेयजल पहुंचेगा और कब आदिवासी परिवारों को इस पीड़ा से मुक्ति मिलेगी।

क्या बोले जिम्मेदार
बुरहानपुर जिले में पानी की समस्या को लेकर SDM भागीरथ वाखला ने कहा कि जिले जल संकट को लेकर प्रति सप्ताह कलेक्टर हर्ष सिंह द्वारा समीक्षा बैठक में किसी भी गांव की जल की समस्या को लेकर जनपद के माध्यम से एवं पीएचई विभाग के माध्यम से निराकरण करने के निर्देश दिए हैं। वाखला ने कहा कि जहां पानी की किल्लत ज़्यादा होती हैं वहां हमारी जिम्मेदारी होती है कि पीचचई विभाग को निर्देशित कर व्यवस्था करवाते हैं। इस संंबंध में अपर कलेक्टर सर्जन श्रीवास्तव ने बताया कि जहां भी जल संकट की सूचना हमें मिलती हैं, हम तुरंत निराकरण का प्रयास करते हैं। जिले में चाहे पंचायत लेवल की हो नगर निगम, नगर परिषद की हो तत्काल संबंधित विभाग को निर्देशित कर व्यवस्था करवाते हैं।   150 फीट गहरी खाई उतरकर गंदा पानी पी रहे आदिवासी   150 फीट गहरी खाई उतरकर गंदा पानी पी रहे आदिवासी   150 फीट गहरी खाई उतरकर गंदा पानी पी रहे आदिवासी  

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