जम्मू के डोडा जिले में सर्चिंग ऑपरेशन के दौरान हादसे में शहीद हुए भिंड के हवलदार शैलेंद्र सिंह भदौरिया का उनके पैतृक गांव चितावली में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। शहीद के 6 वर्षीय बेटे भावेश भदौरिया ने मुखाग्नि दी। इससे पहले जब शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया।
शहीद की अंतिम यात्रा के दौरान लोगों ने फूलों की वर्षा की और शैलेंद्र सिंह भदौरिया अमर रहें के नारे लगाए। श्मशान घाट पर हजारों की भीड़ के बीच जब मासूम भावेश ने पिता का पार्थिव शरीर देखा तो वह फूट-फूटकर रोने लगा। मुखाग्नि देने से पहले वह पिता से लिपट गया। इस मौके पर मेजर अक्षय कुमार, एसडीएम शिवानी अग्रवाल और तहसीलदार जगन सिंह कुशवाहा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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बता दें कि डोडा में सेना का वाहन खाई में गिरने से शैलेंद्र सिंह समेत 10 जवान शहीद हुए थे। पत्नी शिवानी ने बताया कि 21 जनवरी की रात उनकी शैलेंद्र से आखिरी बात हुई थी। उस रात शैलेंद्र ने एक सपना देखा था। उन्होंने बताया मैंने सपने में देखा कि दोनों बेटियों को बहुत पढ़ाया, पैसा खर्च किया लेकिन वे सफल नहीं हो पाईं। घरवाले शादी को लेकर चिंतित हैं, पैसे नहीं बचे हैं।
शहीद के पिता हनुमत सिंह ने गर्व और नम आंखों से कहा मेरे तीन पुत्र हैं। तीनों ही आर्मी में हैं। शैलेंद्र मेरा दूसरा बेटा था। मुझे अपने बेटे पर गर्व है, उसने देश की सेवा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी, ऐसे शूरवीर बेटे पर मैं कुर्बान हूं। उन्होंने बताया कि शैलेंद्र के दादा भी सेना में थे और वर्ष 1972 में शहीद हुए थे। शहीद के बड़े भाई देव सिंह ने बताया कि हम तीन भाई हैं। तीनों ही सेना में रहे हैं। मैं रिटायर हो चुका हूं। एक फौजी होने के नाते गर्व भी है कि भाई ने देश रक्षा में प्राण न्योछावर किए।