जलालपुर (अंबेडकरनगर)। अयोध्या से लगभग 100 किलोमीटर दूर जलालपुर तहसील क्षेत्र के मढवरपुर भुजगी गांव में तमसा नदी के किनारे स्थित भगवान भोलेनाथ का प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि जब भगवान राम वन गमन के लिए जा रहे थे, तब लक्ष्मण जी ने तमसा नदी के तट पर भगवान शिव की शिवलिंग स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की थी। समय के साथ यह मंदिर उपेक्षा का शिकार होकर विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गया था। उस समय यह पूरा क्षेत्र घने जंगल के रूप में था। बाद में स्थानीय लोगों के सहयोग से मंदिर का पुनः अस्तित्व स्थापित किया गया और उसका जीर्णोद्धार कराया गया। वर्तमान में यहां नाग पंचमी और महाशिवरात्रि पर भव्य मेले का आयोजन होता है। प्रत्येक सोमवार और शनिवार को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर के पुजारी कन्हैया लाल गोस्वामी ने बताया कि वर्ष 2001 में जीर्णोद्धार के दौरान एक नाग चार दिनों तक शिवलिंग के आसपास देखा गया था। इसकी सूचना फैलते ही ग्रामीण बड़ी संख्या में दूध लेकर मंदिर पहुंचे और शिवलिंग का जलाभिषेक किया। तभी से यहां श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। स्थानीय निवासी एवं समाजसेवी दीपक त्रिपाठी ने बताया कि मंदिर के जीर्णोद्धार हेतु संस्कृति विभाग द्वारा कुछ कार्य कराया गया है, लेकिन अभी भी कई मूलभूत सुविधाएं अधूरी हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि शाम होते ही मंदिर परिसर अंधेरे में डूब जाता है। प्रकाश व्यवस्था के लिए कई बार उच्च अधिकारियों को लिखित रूप से अवगत कराया गया, किंतु अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं हो सकी है। उन्होंने यह भी बताया कि तमसा नदी पर बना अस्थायी पुल आसपास के आधा दर्जन गांवों को जोड़ता है और इसी मार्ग से श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों ने मंदिर परिसर में स्थायी प्रकाश व्यवस्था और पुल के सुदृढ़ीकरण की मांग की है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। आस्था और ऐतिहासिक महत्व से जुड़ा यह प्राचीन मंदिर आज भी श्रद्धालुओं के विश्वास का केंद्र बना हुआ है, लेकिन इसके समुचित विकास और सुविधाओं की आवश्यकता महसूस की जा रही है।