लखनऊ के गोमतीनगर स्थित कबीर शांति मिशन में ‘अभिव्यक्ति’ संस्था की ओर से कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती के अवसर पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी का विषय ‘प्रेमचंद के साहित्य में स्त्री’ रखा गया। इसमें साहित्यकारों और विचारकों ने प्रेमचंद की रचनाओं में चित्रित महिला पात्रों और उनके संघर्षों पर विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि ‘निर्मला’, ‘सेवासदन’, ‘गबन’ और ‘गोदान’ जैसी रचनाओं में प्रेमचंद ने स्त्री जीवन की पीड़ा, सामाजिक चुनौतियों और उसके भीतर की जिजीविषा को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद का स्त्री-विमर्श आज भी प्रासंगिक है और उनकी रचनाएं मौजूदा सामाजिक परिस्थितियों को समझने में मदद करती हैं। कार्यक्रम में प्रेमचंद के साहित्य को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और उनके सामाजिक विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।