विश्व पर्यावरण दिवस पर गोमती नदी की सफाई के लिए बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया गया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी गोमती की सफाई और संरक्षण को लेकर चिंता जताई थी, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी सवाल खड़े कर रही है। गऊघाट क्षेत्र के पास गोमती नदी का बड़ा हिस्सा जलकुंभी से ढका हुआ दिखाई दे रहा है। नदी में पीछे से बहकर आ रही जलकुंभी को रोकने के लिए पाइप का जाल लगाया गया है और सफाई के लिए मशीनें भी मौके पर खड़ी हैं, लेकिन काफी समय बीत जाने के बावजूद नदी का बड़ा हिस्सा अब भी जलकुंभी की गिरफ्त में है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार जलकुंभी का अत्यधिक फैलाव नदी के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर खतरा है। जलकुंभी पानी की सतह को ढक देती है, जिससे पानी में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। इसका सीधा असर नदी में रहने वाले मछलियों और अन्य जलीय जीवों पर पड़ता है। ऑक्सीजन की कमी के कारण जलीय जीव पानी की सतह और किनारों की ओर आने को मजबूर हो जाते हैं, जहां वे आसानी से शिकारियों के निशाने पर आ जाते हैं। इससे नदी की जैव विविधता प्रभावित हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सफाई अभियान की शुरुआत तो हुई, लेकिन उसके अपेक्षित परिणाम अभी तक दिखाई नहीं दे रहे हैं। लोगों ने मांग की है कि गोमती नदी को जलकुंभी से मुक्त कराने के लिए नियमित और प्रभावी अभियान चलाया जाए, ताकि नदी का प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरणीय संतुलन बरकरार रह सके।