कुर्सी रोड स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय एवं कृत्रिम गर्भाधान केंद्र बदहाली का शिकार है। पशुओं के इलाज के लिए बने इस अस्पताल की इमारत खुद जर्जर हो चुकी है। बरसात में छत टपकने, कमरों में पानी भरने, टूटी खिड़कियों और ध्वस्त शौचालय के बीच डॉक्टर व कर्मचारी किसी तरह काम करने को मजबूर हैं। तीन कमरों वाले इस पशु चिकित्सालय में एक चिकित्सक, एक फार्मासिस्ट सहित कुल चार कर्मचारियों का स्टाफ तैनात है, जिसमें एक महिला कर्मचारी भी शामिल हैं। सबसे अधिक परेशानी बरसात के दिनों में होती है। फार्मासिस्ट के कमरे की छत से लगातार पानी टपकता है, जिससे कमरे में पानी भर जाता है। फाइलों और दवाइयों को बचाने के लिए कर्मचारियों को बार-बार अपनी कुर्सियां और सामान इधर-उधर करना पड़ता है। अस्पताल की कई खिड़कियों की कांच टूट चुकी हैं, कमरों की छत का प्लास्टर कई जगह से झड़ गया है। इससे हर समय हादसे की आशंका बनी रहती है। कर्मचारियों का कहना है कि जर्जर भवन में काम करना जोखिम भरा हो गया है। अस्पताल परिसर में बना शौचालय भी पूरी तरह टूट चुका है। इसका सबसे ज्यादा असर महिला कर्मचारी पर पड़ रहा है, जिन्हें मूलभूत सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। वहीं जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने से बरसात में पूरे परिसर में जलभराव हो जाता है। इससे अस्पताल आने वाले पशुपालकों और कर्मचारियों को कीचड़ और पानी के बीच होकर गुजरना पड़ता है। पशु चिकित्सालय के डॉ अशोक कुमार का कहना है कि विभागीय अधिकारियों को भवन की मरम्मत के लिए पत्र लिखा गया है। वही स्थानीय लोगों का कहना है कि एक ओर सरकार पशुपालन को बढ़ावा देने और पशुओं के बेहतर इलाज का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र का राजकीय पशु चिकित्सालय खुद बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है। लोगों ने भवन की मरम्मत, नए शौचालय के निर्माण और जल निकासी की व्यवस्था कराने की मांग की है, ताकि पशुपालकों और कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।