ढाक एक ऐसा वाद्ययंत्र है जो पश्चिम बंगाल में अमूमन दुर्गा पूजा व अन्य उत्सवों पर बजाया जाता है। यह वाद्ययंत्र अब पश्चिम बंगाल की सीमा से निकलकर देश के अन्य हिस्सों और विदेश तक में लोकप्रिय हो चुका है। इसे लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई है ढाक सम्राट के नाम से मशहूर गोकुल चंद्र दास ने। उन्हें इसके लिए 2025 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। वर्षों तक इस वाद्ययंत्र को केवल पुरुष ही बजाते थे, लेकिन गोकुल चंद्र ने इस परंपरा को तोड़ते हुए 2010 में महिलाओं को ढाक बजाने का प्रशिक्षण देना शुरू किया। आज उनके 240 कलाकारों के समूह में 90 महिलाएं शामिल हैं। कैसरबाग में चल रहे सनतकदा फेस्टिवल में प्रस्तुति देने आए गोकुल चंद्र दास ने अमर उजाला के साथ खास बातचीत में बताया कि उनके परिवार में पिछली कई पीढि़यों से यही काम होता रहा है। बोले, मैंने भी पांच साल की उम्र में अपने पिता मतिलाल दास से ढाक बजाना सीखा।