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लखनऊ: पीजीआई में हुआ उत्तर भारत का पहला हैप्लो-आइडेंटिकल बोन मैरो प्रत्यारोपण; पिता ने दिया बोन मैरो

एसजीपीजीआई के डॉक्टरों ने एक्स-लिंक्ड एड्रेनोलीकोडिस्ट्रोफी (एक्स-एएलडी) से पीड़ित 5 वर्षीय बच्चे का सफल हैप्लो-आइडेंटिकल बोन मैरो ट्रांसप्लांट कर जान बचाई है। हिमेटोलॉजी विभाग में हुआ यह उत्तर भारत में अपनी तरह का पहला सफल प्रत्यारोपण है, जिसमें पिता डोनर बने। बच्चे का इलाज केंद्र सरकार की दुर्लभ बीमारियों के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम योजना के तहत हुआ। हिमेटोलॉजी विभाग के डॉ. सायन सिन्हा रॉय ने बताया कि बस्ती निवासी व्यक्ति बेटे को लेकर संस्थान के जेनेटिक्स विभाग में पहुंचे थे। यहां जांच में दुर्लभ बीमारी का पता लगा। बच्चे को हिमेटोलॉजी विभाग भेजा गया। डॉक्टरों ने परिवार की सहमति पर जनवरी में सफल प्रत्यारोपण किया। अब बच्चे की स्थिति पूरी तरह ठीक है। डॉ. सायन सिन्हा ने बताया कि उत्तर भारत में एक्स-एएलडी के लिए यह संस्थान का पहला सफल हैप्लो-आइडेंटिकल बोन मैरो ट्रांसप्लांट है। पीजीआई के निदेशक पद्मश्री डॉ. आरके धीमन ने प्रत्यारोपण करने वाली पूरी टीम को बधाई दी। डॉ. रॉय के मुताबिक, एक्स-एएलडी दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है। इसमें एबीसीडी-1 जीन में बदलाव के कारण शरीर में बहुत लंबी शृंखला वाले फैटी एसिड (वीएलसीएफए) जमा होने लगते हैं। इससे धीरे-धीरे मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचता है। यह बीमारी मुख्य रूप से लड़कों में होती है। समय पर इलाज न मिलने पर बच्चे में गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्या हो सकती है।

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