पिछले कुछ सालों में पैनिक अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इससे सबसे अधिक 18-25 साल के लोग प्रभावित हो रहे हैं। लखनऊ के केजीएमयू के मनोरोग विभाग के मनोचिकित्सक प्रो. आदर्श त्रिपाठी बताते हैं कि पैनिक अटैक एक बीमारी है। हार्ट अटैक की तरह ही अचानक से इसका पता चलता है। इस दौरान व्यक्ति को सांस लेने दिक्कत होती है, सीने में दर्द होने लगता है। व्यक्ति को मरने का डर सताने लगाता है। महिलाओं में पुरुषों की तुलना चार से पांच गुना खतरा अधिक होता है। पैनिक अटैक के कारण, बचाव, लक्षण के बारे में मनोचिकित्सक डॉ. आदर्श त्रिपाठी ने कई अहम जानकारी साझा की।