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UP Politics: किसी प्रत्याशी का आधिकारिक रूप से समर्थन नहीं करेगी सपा, बड़ा फैसला!

आने वाले पंचायत चुनावों में समाजवादी पार्टी (सपा) ने बड़ा फैसला लिया है। पार्टी अब इन चुनावों में अपने आधिकारिक प्रत्याशी नहीं उतारेगी। सपा सूत्रों के मुताबिक, ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत सदस्य पदों पर पार्टी किसी उम्मीदवार को अधिकृत रूप से मैदान में नहीं उतारेगी। दरअसल, इन पदों पर पार्टी के कई कार्यकर्ता दावेदार हैं और किसी एक का समर्थन करने से संगठन में फूट की आशंका है। इसलिए सपा ने पंचायत चुनावों में निष्पक्ष रुख अपनाने का निर्णय लिया है।

पार्टी की रणनीति के अनुसार, जो कार्यकर्ता क्षेत्र पंचायत या जिला पंचायत सदस्य के रूप में जीतकर आएंगे, उन्हें आगे ब्लॉक प्रमुख या जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में प्राथमिकता दी जाएगी। हालांकि सपा ने इस रणनीति की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

इसी बीच सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के हालिया बयान ने पार्टी की राजनीतिक दिशा को स्पष्ट किया है। अखिलेश ने बसपा नेता आकाश आनंद पर सीधा हमला करते हुए कहा कि “आकाश आनंद की जरूरत भाजपा को ज्यादा है।” राजनीतिक विश्लेषक इसे सपा की बदली रणनीति का संकेत मान रहे हैं। दरअसल, 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा के साथ गठबंधन के बाद से सपा ने मायावती या उनके परिवार पर सीधा हमला करने से परहेज किया था।

अब अखिलेश का रुख बताता है कि सपा 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए दलित मतदाताओं पर फोकस कर रही है। पार्टी मानती है कि सत्ता तक पहुंचने के लिए दलित समुदाय का समर्थन अहम है। सपा ने अपने नेताओं को दलितों के बीच सक्रिय रहने और अत्याचार के मामलों को प्रमुखता से उठाने का निर्देश दिया है। रायबरेली में वाल्मीकि युवक की हत्या को सपा ने इसी रणनीति का हिस्सा बनाते हुए जोरदार तरीके से उठाया है।
दिलचस्प बात यह है कि अखिलेश की टिप्पणी पर अब तक भाजपा के किसी बड़े नेता की प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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