झारखंड में सब्जियां उगाने वाले किसान परेशानियों से उबरने की कोशिश में हैं। भारी बारिश और बाढ़ से उन्हें काफी नुकसान हुआ था। अब वे अपनी जिंदगी दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। खेतों में काम करते कई किसान अपने नुकसान और उससे उबरने की कहानियां बताते हैं। उन्हें उम्मीद है कि मौजूदा मौसम नई शुरुआत में मददगार होगा।
इच्छापिडी गांव के किसान लाला गोप ने कहा कि, इस बरसात में जितना पानी हम पहले कभी नहीं देखे थे, जितना अबकी बार बारिश हुआ है। और अभी तक होते ही रहा है। जितना फसल था, सबमें नुकसान है। सबकुछ सही रहता है तो चार लाख, पांच लाख छह महीना में हम लोगों का हो जाता है। बेनिफिट, कमाई। नुकसान तो लगभग चार लाख के आसपास का हो गया है मेरा।
इसी भरोसे पर किसान खेतों का रुख कर रहे हैं। उन्हें यकीन है कि सब्जियों की खेती से उन्हें अच्छा मुनाफा होगा और वे पिछले सीजन में हुए नुकसान की भरपाई कर सकेंगे। हालांकि उन्हें अभी तक सरकारी मदद का इंतजार है। इस वजह से माहौल में अनिश्चितता भी है। कोंकी गांव के किसान दाहरू ओरांव ने कहा कि, बारिश इतना जोरदार हम लोग नहीं देखे हैं। अभी जो हम लोग ई खेत में जो खड़ा हैं, इनमें इससे पहले हम लोग एक फसल लगा चुके थे। ऊ बिल्कुल पानी की वजह से मेरा खत्म हो गया। ई दूसरा फसल है। सहायता क्या? बैल-बकरी बेच के लगा दिए हैं। अब सहायता जब तक सरकार से नहीं होगा, तो फिर हम लगाएंगे खेती में कैसे? बाल-बच्चा मेरा पालन-पोषण होगा कैसे? पढ़ाई-लिखाई कैसे होगा? यही सोच रहे हैं हम।
सब्जियां उगाने वाले किसान इन दिनों खेतों में नए पौधे लगा रहे हैं। वर्षों से उनकी जिंदगी प्रकृति की दया के भरोसे रही है। उन्हें अपनी परेशानियों के स्थायी समाधान का इंतजार है।