प्रदेश में उद्योग जगत की उन्नति कमजोर हो रही है। बीते कुछ सालों से जीएसटी और सरकारी रियायतों में मिली छूट के खत्म होने से उद्योगपति भारी तनाव झेल रहे हैं। आलम यह है कि जिन उद्योगों की चाबियां पीढ़ी दर पीढ़ी जम्मू-कश्मीर की पुश्तें थामती आ रहीं थीं उन्हें मौजूदा उद्योपतियों ने आगे नहीं बढ़ाया है। प्रदेश के ज्यादातर उद्योगपतियों के बच्चे उच्च शिक्षा के लिए विदेश में पढ़ाई कर रहे हैं और वे उद्योगों से जुड़ने को तैयार नहीं हैं। अमर उजाला संवाद में उद्योगों को बचाने की चुनौतियां सामने आई है। उद्योगपति किसी भी सूरत में पुराने उद्योगों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं और इसके लिए उन्हें सरकार से उम्मीदें हैं। नए उद्योगों को विकसित करने के लिए जिन जगहों का चयन किया गया है उनमें बिजली और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की वकालत भी उद्योगपति कर रहे हैं।