रविवार से शुरू हुए नवरात्र के साथ ही रियासी में श्री दुर्गा नाटक मंडली की तरफ से ऐतिहासिक रामलीला की शुरुआत की गई। इसके साथ ही रियासी की रामलीला ने अपने 134 वें वर्ष में प्रवेश किया। इसकी शुरुआत रामलीला मंडली के साथ जुड़े हुए दिवंगत कलाकारों के परिवारों के सदस्यों के द्वारा दीप प्रज्वलित करके की गई। इस के बाद श्री गणेश भगवान की पूजा कर प्रसाद बांटा गया। रामलीला के पहले दृश्य कैलाश तलहटी में भगवान शिव और रावण के बीच कैलाश पर्वत पार करते हुए संवाद को दिखाया गया, जिसमें रावण की भक्ति से प्रसन्न हो कर भगवान शिव उन्हें चंद्रहास तलवार देते हैं। दूसरा दृश्य रावण वेदमती संवाद हुआ, जिसमें रावण के नापाक इरादों को भांपते हुए वेदमती अग्नि में प्रवेश कर जाती है। वह रावण को उस का काल बनकर लौटने की बात कहती है। रामलीला की पहली रात्रि का अंतिम दृश्य देवलोक मंचित हुआ, जिसमें सभी देवगण रावण के अत्याचारों से परेशान होकर भगवान विष्णु के पास जाते हैं। उनकी स्तुति कर रावण के जुल्मों के बारे बताते हैं, जिसके बाद विष्णु देवगणों को जल्द ही पृथ्वी लोक पर जन्म ले कर रावण का अंत करने का विश्वास दिलाते हैं।