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India ब्लॉक की मीटिंग में किस बात पर भड़के Kharge? India Alliance Meeting | Mallikarjun Kharge

Mon, 08 Jun 2026 05:57 PM IST
Adarsh Jha अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम

क्या विपक्ष फिर से एकजुट होने की राह पर है, या फिर इंडिया गठबंधन के भीतर की दरारें और गहरी होने वाली हैं? दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आज जुटे विपक्षी नेताओं की इस बैठक पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं। अनेकों मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी तो दिख रही है, लेकिन सवाल यह भी है कि क्या सभी दल एक सुर में बोल पाएंगे? डीएमके और आम आदमी पार्टी की गैरमौजूदगी ने चर्चाओं को और तेज कर दिया है। आखिर इस बैठक से क्या निकलेगा- मजबूत विपक्षी रणनीति या फिर अंदरूनी मतभेदों की नई कहानी? इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विपक्षी दलों से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि यही सरकार को चुनौती देने का सबसे बड़ा हथियार है। इसके साथ ही उन्होंने कई मुद्दे भी गिनाए जिसको लेकर खरगे मोदी सरकार पर जमकर बरसे भी। वो मुद्दे कौन से हैं इस वीडियो में आपको बताएंगे। इस बैठक में राहुल गांधी, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, सुप्रिया सुले और उमर अब्दुल्ला समेत कई बड़े नेता शामिल हुए, लेकिन डीएमके और आम आदमी पार्टी की गैरमौजूदगी ने गठबंधन की एकता पर सवाल भी खड़े कर दिए। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इंडिया गठबंधन अपने अंदरूनी मतभेद भुलाकर एकजुट विपक्ष की तस्वीर पेश कर पाएगा, या फिर राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं इस एकता की राह में रोड़ा बनेंगी? इन्हीं तमाम सवालों के जवाब आपको इस वीडियो में दूंगा और बताऊँगा आखिर आज की इस बैठक में क्या-क्या हुआ। 

दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में सोमवार को विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक की अहम बैठक आयोजित हुई, जिसमें केंद्र सरकार के खिलाफ साझा रणनीति बनाने के साथ-साथ गठबंधन की एकजुटता को मजबूत करने पर जोर दिया गया। हाल ही में चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों के बाद विपक्षी दलों के बीच उभरे मतभेदों के बीच आयोजित इस बैठक को आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने की। इसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला समेत कई प्रमुख विपक्षी नेता शामिल हुए। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे वर्चुअल माध्यम से बैठक में जुड़े। हालांकि, द्रमुक (डीएमके) और आम आदमी पार्टी की अनुपस्थिति ने विपक्षी एकता को लेकर नए सवाल भी खड़े किए।

बैठक को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विपक्षी दलों की एकजुटता को लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि यही एकता केंद्र सरकार को चुनौती देने का सबसे प्रभावी हथियार है। खरगे ने देश के सामने मौजूद आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए महंगाई, बेरोजगारी, आर्थिक सुस्ती, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और विदेश नीति को प्रमुख मुद्दा बताया।

खरगे ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के तहत मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के माध्यम से लाखों लोगों के मतदान अधिकार प्रभावित होने का खतरा है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और संविधान पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है, ऐसे में विपक्षी दलों को साझा मंच से आवाज बुलंद करनी होगी।

बैठक के दौरान संसद में विपक्षी दलों की एकजुटता का भी उल्लेख किया गया। खरगे ने कहा कि इंडिया गठबंधन ने मिलकर कई विवादित विधेयकों का विरोध किया और संसद के भीतर प्रभावी भूमिका निभाई। उन्होंने दावा किया कि संविधान संशोधन, परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े विधेयकों के खिलाफ विपक्ष की संयुक्त रणनीति ने सरकार को चुनौती दी। उन्होंने गठबंधन के सभी घटक दलों से आपसी समन्वय बढ़ाने और राजनीतिक मतभेदों को पीछे छोड़ने की अपील की।

बैठक में आर्थिक मुद्दे भी प्रमुखता से उठे। खरगे ने कहा कि देश में रोजगार सृजन की गति जरूरत के अनुरूप नहीं है। उन्होंने एमएसएमई क्षेत्र के भविष्य को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि छोटे और मध्यम उद्योगों पर दबाव बढ़ रहा है। साथ ही निजी क्षेत्र में बढ़ते एकाधिकार और निवेश की धीमी रफ्तार को भी उन्होंने चिंता का विषय बताया। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में अव्यवस्था और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी के कारण लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी बैठक के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक सौहार्द की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन केवल मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर ही नहीं बल्कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों पर भी नजर बनाए हुए है। अखिलेश ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए समाज में भाईचारे और सामाजिक न्याय की भावना को आगे बढ़ाना जरूरी है।

एनसीपी (एससीपी) सांसद सुप्रिया सुले ने देश में आर्थिक संकट, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार को गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष का दायित्व है कि वह जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाए और सरकार को जवाबदेह बनाए।

हालांकि विपक्ष की इस बैठक पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि इंडिया ब्लॉक जनता का विश्वास खो चुका है और यह केवल सत्ता हासिल करने के उद्देश्य से एकत्र हुए नेताओं का समूह बनकर रह गया है। भाजपा ने दावा किया कि विपक्षी दलों के बीच वैचारिक और राजनीतिक मतभेद इतने गहरे हैं कि साझा रणनीति बनाना उनके लिए आसान नहीं होगा।

इस बीच डीएमके और आम आदमी पार्टी की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी रही। हालांकि वामपंथी नेता दीपांकर भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि डीएमके बैठक में भले शामिल नहीं हुई हो, लेकिन वह विपक्षी एकता के साथ मजबूती से खड़ी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हालिया विधानसभा चुनावों के दौरान विभिन्न राज्यों में विपक्षी दलों के बीच सीट बंटवारे और रणनीति को लेकर जो मतभेद सामने आए थे, उन्हें दूर करना इंडिया ब्लॉक के लिए बड़ी चुनौती होगी।

बैठक के अंत में गठबंधन नेताओं ने संकेत दिए कि आने वाले समय में महंगाई, बेरोजगारी, चुनावी प्रक्रिया, संविधान और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए संयुक्त अभियान चलाया जा सकता है। साथ ही संसद से लेकर सड़क तक विपक्ष की एकजुटता बनाए रखने पर भी सहमति बनी। बैठक के बाद इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने संयुक्त रूप से मीडिया को संबोधित कर विपक्षी एकता और साझा संघर्ष का संदेश देने की तैयारी भी की।

कुल मिलाकर दिल्ली में हुई यह बैठक विपक्षी राजनीति के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि गठबंधन के भीतर मौजूद मतभेद पूरी तरह खत्म हुए हैं या नहीं, यह आने वाले दिनों में साफ होगा, लेकिन फिलहाल विपक्ष ने एक मंच पर आकर यह संदेश जरूर देने की कोशिश की है कि वह केंद्र सरकार के खिलाफ साझा लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है।

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