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शुभांशु शुक्ला की उपलब्धि पर कांग्रेस नेता उदित राज ने ये क्या कह दिया?

Tue, 15 Jul 2025 07:20 PM IST
आदर्श वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम

एक ओर पूरा देश गर्व कर रहा है कि भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर 18 दिन बिताकर 60 से ज्यादा वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम दिया। वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस नेता उदित राज के एक बयान ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि की चमक को जातिगत बहस में तब्दील कर दिया है।

कांग्रेस नेता उदित राज ने मंगलवार को एक बयान में कहा – “पहले जो राकेश शर्मा अंतरिक्ष में गए थे, उस समय एससी-एसटी, ओबीसी इतने पढ़े-लिखे नहीं थे। अब तो समय बदल चुका है, किसी दलित या ओबीसी को भी शुभांशु शुक्ला की जगह भेजा जा सकता था। ऐसा नहीं है कि नासा ने कोई परीक्षा लेकर उनका चयन किया।…”

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वे शुभांशु शुक्ला को शुभकामनाएं देते हैं और उनके ज्ञान से मानवता को लाभ होने की उम्मीद है, लेकिन उनका यह कहना कि “जाति आधारित चयन संभव था”, देशभर में कड़ी प्रतिक्रिया का कारण बन गया।

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला भारतीय वायुसेना के सीनियर पायलट हैं। वे 25 जून को Axiom-4 मिशन के तहत तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों के साथ अंतरिक्ष के लिए रवाना हुए थे।
18 दिन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर रहकर उन्होंने इसरो के 7 महत्वपूर्ण प्रयोगों समेत 60 वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम दिया।

इस मिशन के जरिए उन्होंने 263 किलो वैज्ञानिक डेटा और उपकरण धरती पर वापस लाए हैं, जो आने वाले वर्षों में गगनयान मिशन और अन्य अंतरिक्ष परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण योगदान देगा।

भारत सरकार ने एक्सिओम-4 मिशन के तहत शुभांशु शुक्ला की ट्रेनिंग, लॉजिस्टिक्स और मिशन सहयोग पर करीब 550 करोड़ रुपये खर्च किए। यह निवेश इसरो के भविष्य के मानव मिशनों के लिए एक टेस्ट रन की तरह है। इसके जरिए भारतीय वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष में काम करने के व्यवहारिक अनुभव और डेटा प्राप्त हुआ है।

यह सवाल अब गंभीर हो गया है कि क्या विज्ञान और तकनीकी उपलब्धियां भी अब राजनीतिक और जातिगत बहसों के दायरे में आ जाएंगी?
एक ओर जहां शुभांशु शुक्ला का मिशन भारत को मानव अंतरिक्ष मिशन के नए युग में ले जा रहा है, वहीं जमीन पर जाति आधारित टिप्पणियां और प्रतिक्रियाएं वैज्ञानिक उपलब्धियों के मूल उद्देश्य को चुनौती देती नजर आ रही हैं।

शुभांशु शुक्ला की सफलता व्यक्तिगत नहीं, बल्कि भारत के अंतरिक्ष विज्ञान की जीत है। ऐसे में जरूरी है कि इस ऐतिहासिक उपलब्धि को राजनीतिक विवादों से ऊपर रखा जाए और देश का ध्यान गर्व और प्रेरणा पर केंद्रित रहे।

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