मानसून का इंतजार तो पूरे देश को था... लेकिन अब यही बारिश कई राज्यों के लिए आफत बन गई है। कहीं पहाड़ दरक रहे हैं... कहीं नदियां उफान पर हैं... तो कहीं बाढ़ और भूस्खलन ने जिंदगी की रफ्तार थाम दी है। आखिर किन राज्यों में सबसे ज्यादा तबाही मची है? मौसम विभाग ने किन इलाकों के लिए बड़ा अलर्ट जारी किया है? देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट।
दक्षिण-पश्चिम मानसून अब पूरे देश में सक्रिय हो चुका है और इसके साथ ही कई राज्यों में मूसलाधार बारिश जनजीवन पर भारी पड़ रही है। सबसे ज्यादा असर पश्चिमी हिमालयी राज्यों हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में देखने को मिल रहा है, जहां लगातार हो रही बारिश ने बाढ़, भूस्खलन और सड़क बंद होने जैसी गंभीर समस्याएं खड़ी कर दी हैं।
हिमाचल प्रदेश में शुक्रवार को बारिश से जुड़ी घटनाओं में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दो लोग घायल हुए हैं। कुल्लू जिले में पहाड़ी से गिरे विशाल पत्थर की चपेट में आने से 70 वर्षीय बुजुर्ग ने दम तोड़ दिया। वहीं कालका-शिमला राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ, जिससे यातायात प्रभावित हुआ और कई लोग घायल भी हुए। सिरमौर और सोलन जिले सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं, जहां लगातार बारिश के कारण हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।
उत्तराखंड में भी हालात किसी आपदा से कम नहीं हैं। यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग सहित 118 सड़कें बंद हैं, जबकि गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण अब तक बहाल नहीं हो सका है। कई इलाकों में पहाड़ी नाले उफान पर हैं और अचानक बाढ़ का खतरा बना हुआ है। भारी बारिश को देखते हुए देहरादून समेत सात जिलों में 12वीं तक के सभी स्कूल बंद कर दिए गए। हरिद्वार जिले के भगवानपुर क्षेत्र में उफनती नदी में डूबने से 18 वर्षीय युवक की मौत हो गई।
मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के अलावा उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में अगले तीन से चार दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और प्रशासन की सलाह का पालन करने की अपील की गई है।
पूर्वोत्तर भारत भी बारिश की मार झेल रहा है। त्रिपुरा में लगातार हो रही बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। राज्य के उनकोटी, खोवाई और धलाई जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं। बाढ़ की वजह से करीब 11 हजार लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं, जबकि चार हजार से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है।
केरल के वायनाड में भी भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। टनल निर्माण स्थल पर हुए भूस्खलन में शुक्रवार को एक और शव बरामद किया गया, जिसके बाद मृतकों की संख्या बढ़कर सात हो गई है। वहीं एक निर्माण प्रबंधक अब भी लापता हैं और उनकी तलाश जारी है।
महाराष्ट्र में मुंबई को भले ही बारिश से कुछ राहत मिली हो, लेकिन पुणे में हालात अभी भी गंभीर हैं। कूड़े के पहाड़ के नीचे दबे भवन में आठ लोग अब भी फंसे हुए हैं। बचाव दल लगातार मलबा हटाकर लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर भोर घाट में भारी भूस्खलन के कारण मुंबई-पुणे रेल मार्ग प्रभावित है। इस वजह से लंबी दूरी की 30 ट्रेनों को रद्द करना पड़ा है और रेल सेवाएं जल्द सामान्य होने की संभावना भी कम है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, बीते 24 घंटों में हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, पूर्वी मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और पूर्वोत्तर के अधिकांश राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गई। राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा, तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना और कर्नाटक के कई हिस्सों में भी तेज बारिश के साथ 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं।
मानसून की यह बारिश जहां एक ओर खेतों के लिए राहत लेकर आई है, वहीं दूसरी ओर पहाड़ी और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। ऐसे में प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रहा है। आने वाले कुछ दिन बेहद अहम हैं, क्योंकि मौसम विभाग ने अभी और भारी बारिश की संभावना जताई है।