AMMK के जनरल सेक्रेटरी टी.टी.वी. दिनाकरन ने गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को एक लेटर सौंपा, जिसमें उन्होंने राज्य में नई सरकार बनाने के लिए AIADMK के जनरल सेक्रेटरी एडप्पादी पलानीसामी को सपोर्ट दिया।
AMMK के महासचिव T.T.V. दिनाकरन ने कहा, "मैं AIADMK का समर्थन कर रहा हूं। मैंने सरकार बनाने के लिए एडप्पादी पलानीस्वामी के समर्थन में यह पत्र सौंपा है। हमारे विधायक कामराज ने भी इस पर हस्ताक्षर किए हैं और इसे मेरे सचिव के ज़रिए भेजा है। जब मैंने TVK देखा, तो मैं हैरान रह गया, क्योंकि वहाँ कोई दूसरा ही पत्र था शायद कोई जाली पत्र, या फिर यह विधायकों की खरीद-फरोख्त हो सकती है। मैंने अपने विधायक को फ़ोन किया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया... उन्होंने शाम करीब 6:30 बजे इस पत्र पर हस्ताक्षर किए थे और इसे यहाँ भेजा था।
जब मैंने TV पर देखा कि हमारी पार्टी ने विजय का समर्थन किया है, तो मैं हैरान रह गया। इसलिए, मैंने राज्यपाल से मिलने का समय लिया और उन्हें वह पत्र सौंपकर उनसे इस मामले की जाँच करने का आग्रह किया। मुझे लगता है कि यह जाली है या फिर विधायकों की खरीद-फरोख्त का मामला है.उन्हें इसकी अनुमति नहीं देनी चाहिए
दिनाकरन ने राज्यपाल को दिए गए पत्र में कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में स्थिर सरकार की आवश्यकता है और AIADMK के नेता एडप्पादी पलानीसामी इस भूमिका को निभाने में सक्षम हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में राजनीतिक खरीद-फरोख्त और जोड़तोड़ की राजनीति लोकतंत्र के लिए सही नहीं है। इसलिए राज्यपाल को ऐसे नेता को आमंत्रित करना चाहिए जो स्थिर प्रशासन दे सके। इस घटनाक्रम ने तमिलनाडु की राजनीति को और अधिक रोचक बना दिया है, क्योंकि चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी विजय की पार्टी भी सरकार बनाने का दावा पेश कर चुकी है। हालांकि राज्यपाल अभी तक अंतिम निर्णय नहीं ले पाए हैं और बहुमत के आंकड़े को लेकर विभिन्न दलों के बीच राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिनाकरन का यह कदम तमिलनाडु की सत्ता समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। खास बात यह है कि पहले कई मौकों पर दिनाकरन और पलानीसामी के बीच राजनीतिक मतभेद देखने को मिले थे, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में AMMK द्वारा AIADMK को समर्थन देने की बात सामने आने से नई राजनीतिक संभावनाएं बन गई हैं। अब सबकी नजर राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर के अगले फैसले पर टिकी हुई है, क्योंकि वही तय करेंगे कि तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए किस दल या गठबंधन को मौका दिया जाएगा।