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Vice President Elections: सीपी राधाकृष्णन और बी सुदर्शन रड्डी की उम्मीवारी में NDA-INDIA क्यों घिरा

वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम Updated Wed, 20 Aug 2025 01:39 PM IST

उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 की सरगर्मियां तेज हो गई हैं. इस बार यह चुनाव क्षेत्रीय और राजनीतिक समीकरणों के कारण बेहद रोचक हो गया है. इंडिया गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी. सुदर्शन रेड्डी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है, जो आंध्र प्रदेश के रंगारेड्डी जिले से ताल्लुक रखते हैं. दूसरी ओर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने महाराष्ट्र के राज्यपाल और तमिलनाडु से आने वाले सीपी राधाकृष्णन को मैदान में उतारा है. दोनों उम्मीदवारों के क्षेत्रीय मूल ने इस चुनाव को दिलचस्प मोड़ दे दिया है. इससे एनडीए और इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों के सामने धर्म संकट खड़ा हो गया है.इंडिया गठबंधन की रणनीति ने एनडीए को मुश्किल में डाल दिया है. सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाकर गठबंधन ने आंध्र प्रदेश की राजनीति में नया समीकरण बनाया है. आंध्र प्रदेश में सत्ताधारी तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) और विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) दोनों के लिए यह फैसला चुनौतीपूर्ण है. टीडीपी एनडीए की अहम सहयोगी है. उसके प्रमुख और मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू अब क्षेत्रीय गौरव और गठबंधन की वफादारी के बीच फंस गए हैं. सुदर्शन रेड्डी के आंध्र प्रदेश से होने के कारण टीडीपी पर दबाव बढ़ गया है कि वह अपने राज्य के नेता का समर्थन करे.

दूसरी ओर YSRCP प्रमुख जगन मोहन रेड्डी पहले ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से बातचीत के बाद एनडीए उम्मीदवार राधाकृष्णन के समर्थन की घोषणा कर चुके हैं. लेकिन सुदर्शन रेड्डी के मैदान में उतरने से उनकी स्थिति भी जटिल हो गई है. आंध्र प्रदेश में YSRCP का आधार मुख्य रूप से रेड्डी समुदाय में है और सुदर्शन रेड्डी के नाम ने उनके समर्थकों के बीच क्षेत्रीय भावनाओं को जगा दिया है. जगन के लिए अब यह फैसला आसान नहीं होगा कि वे एनडीए के प्रति अपनी प्रतिबद्धता निभाएं या अपने राज्य के उम्मीदवार का समर्थन करें.उधर, एनडीए की रणनीति भी तमिलनाडु के समीकरणों पर आधारित थी. राधाकृष्णन तमिलनाडु के ओबीसी गाउंडर समुदाय से आते हैं. उनको उम्मीदवार बनाकर बीजेपी ने डीएमके को असमंजस में डालने की कोशिश की थी. डीएमके इंडिया गठबंधन का हिस्सा है. उसके लिए राधाकृष्णन का तमिल मूल एक चुनौती थी, क्योंकि तमिल गौरव उनके लिए बड़ा मुद्दा है. हालांकि, डीएमके ने सुदर्शन रेड्डी के समर्थन का फैसला किया है, जिससे यह साफ हो गया कि वे गठबंधन धर्म को प्राथमिकता देंगे. चुनावी गणित की बात करें तो एनडीए के पास लोकसभा और राज्यसभा में 422 सांसदों का समर्थन है, जो जीत के लिए जरूरी 394 वोटों से अधिक है. YSRCP के समर्थन ने उनकी स्थिति को और मजबूत किया था.


लेकिन सुदर्शन रेड्डी के नाम ने आंध्र प्रदेश में क्षेत्रीय भावनाओं को हवा दी है, जिससे टीडीपी और YSRCP के सांसदों के बीच क्रॉस-वोटिंग की संभावना बढ़ गई है. यह चुनाव न केवल उपराष्ट्रपति पद के लिए है, बल्कि क्षेत्रीय और राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी एक बड़ा इम्तिहान है.इंडिया गठबंधन को उम्मीद है कि स्टेट प्राइड के नाम पर टीडीपी नेता चंद्र बाबू नायडू का भी सपोर्ट उन्हें मिल सकता है. इसके साथ ही विपक्ष को लगता है कि को लगता है कि वाईएसआरसीपी कांग्रेस और बीआरएस भी सुदर्शन रेड्डी को समर्थन देने के लिए मजबूर हो सकते हैं. गौरतलब है कि अभी तक ये तीनों दल टीडीपी, वाईएसआरसीपी और बीआरएस ने एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन को अपने समर्थन देने की घोषणा कर चुके हैं. और इंडिया गुट के उम्मीदवार जस्टिस रेड्डी की इंडिया गुट के उम्मीदवार जस्टिस रेड्डी की उम्मीदवारी के बाद भी वे अपने निर्णय पर कायम हैं. यानी, इंडिया गुट का तेलुगू कार्ड चल नहीं पाया है.

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