देश में आज (9 सितंबर) उपराष्ट्रपति चुनाव का दिन है। एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन का मुकाबला इंडिया गठबंधन की तरफ से उतारे गए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी. सुदर्शन रेड्डी से है। इसी दिन शाम तक या देर रात तक मतगणना होगी और देश के अगले उपराष्ट्रपति का नाम तय हो जाएगा।ऐसे में यह जानना अहम है कि उपराष्ट्रपति चुनाव का पूरा गणित क्या है? कौन-कौन इस चुनाव में वोट डालेगा और जीत का आंकड़ा क्या होगा? चुनाव में सरकार और विपक्ष के बीच कैसे मतों को लेकर खींचतान रह सकती है? आइये जानते हैं...कौन-कौन डालेगा वोट?
उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचक मंडल यानी इलेक्टोरल कॉलेज के जरिए आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति से होता है। संसद के दोनों सदनों के सदस्य इसमें हिस्सा लेते हैं। राष्ट्रपति चुनाव में निर्वाचित सांसदों के साथ-साथ विधायक भी मतदान करते हैं, लेकिन उपराष्ट्रपति चुनाव में केवल लोकसभा और राज्यसभा के सांसद ही वोट डाल सकते हैं। राज्यसभा के मनोनीत सांसदों को भी वोट डालने का अधिकार दिया गया है। राज्यसभा में फिलहाल 12 मनोनीत सदस्य हैं। अब जानें- क्या है सरकार और विपक्ष का गणित?
केंद्र में मौजूदा समय में एनडीए के पास बहुमत है। यानी सीधे शब्दों में कहें तो लोकसभा में इस गठबंधन के पास पूर्ण बहुमत है। हालांकि, विपक्षी इंडिया गठबंधन भी खास पीछे नहीं है। ऐसे में आगे का खेल बचता है राज्यसभा के सांसदों से। यहां भी टक्कर कांटे की है।
लोकसभा में क्या है एनडीए-इंडिया गठबंधन का गणित?
लोकसभा की 542 सीटों में से एनडीए के पास फिलहाल 293 सांसद हैं। इनमें अकेले भाजपा के पास 240 सांसद हैं। इसके बाद दो और पार्टियों- तेदेपा और जदयू के पास क्रमशः 16 और 12 सीटें हैं। वहीं, शिवसेना के पास सात और लोजपा के पास पांच सांसद हैं। इन पांच पार्टियों को ही मिला दें तो एनडीए बहुमत के आंकड़े के पार पहुंच जाता है। वहीं, छोटी-बड़ी सभी पार्टियों का साथ रहने पर 293 वोट एनडीए को मिलना तय हैं। इसके अलावा वाईएसआर कांग्रेस ने सीपी राधाकृष्णन को समर्थन देने का फैसला किया है। इस लिहाज से एनडीए के पास चार और सांसद जुड़ने के साथ उसे कुल 297 वोट मिल जाएंगे।
दूसरी तरफ विपक्षी इंडिया गठबंधन के पास 235 सीटें हैं, जो कि भाजपा से भी पांच सीट कम हैं। लोकसभा में मौजूदा समय में सात निर्दलियों और रुख न साफ करने वाली तीन पार्टियों के सांसदों को मिला भी दिया जाए तो 10 सीटें होती हैं, जो कि इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार को जिताने के लिए नाकाफी होंगी। यानी लोकसभा के दम पर विपक्ष का उपराष्ट्रपति चुनाव में अपने नेता को जिताना बिना एनडीए की पार्टियों में टूट-फूट कराए संभव नहीं होगा।
2. राज्यसभा में क्या है एनडीए-इंडिया का गणित?
राज्यसभा में 239 सांसदों के मौजूदा आंकड़े में से एनडीए के पास 125 सांसद हैं। इनमें अकेले भाजपा के पास 102 सीटें हैं। साथ ही वाईएसआर कांग्रेस के सात सांसदों को मिला दें तो एनडीए के पास 132 सांसदों का समर्थन है। वहीं, विपक्षी इंडिया गठबंधन के पास 85 सांसद हैं। दरअसल, राज्यसभा में फिलहाल 12 मनोनीत सांसदों में से पांच भाजपा के सदस्य हैं। इसके अलावा बचे हुए सात नामित सांसदों का रुख तय नहीं है। तीन सांसद निर्दलीय हैं। यानी कुल 10 सांसद किसी भी पक्ष में वोट कर सकते हैं। इसके अलावा बीजद-बीआरएस वोट नहीं करेंगे। अगर बचे हुए सात मनोनीत सांसद और तीन निर्दलीय सांसद मिलकर भी अपना समर्थन इंडिया गठबंधन को दे दें तो भी इंडिया गठबंधन की सीटों की संख्या 95 पहुंचेगी। इस स्थिति में भी विपक्ष एनडीए से पीछे ही रहेगा। कुल मिलाकर देखा जाए तो लोकसभा और राज्यसभा को मिलाकर एनडीए के पक्ष में 434 वोट पड़ना लगभग तय है। दूसरी तरफ इंडिया गठबंधन को सामान्य तौर पर 320 वोट मिल सकते हैं। इन आंकड़ों में लोकसभा और राज्यसभा के निर्दलियों और राज्यसभा के ऐसे मनोनीत सांसदों को शामिल नहीं किया गया है, जो कि किसी पार्टी में शामिल नहीं हैं। ऐसे में एनडीए और इंडिया के उम्मीदवारों को मिलने वाले वोटों में बदलाव संभव है।