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UP SIR News: यूपी में फिर बढ़ाई गई एसआईआर की तारीख, इस दिन आएगी फाइनल वोटर लिस्ट

वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम Updated Sat, 07 Feb 2026 04:45 AM IST

उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्यक्रम के तहत मतदाता सूची से जुड़े दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की समय-सीमा को बढ़ाकर 6 मार्च तक कर दिया गया है। पहले यह अंतिम तिथि इससे पहले निर्धारित थी, लेकिन मतदाताओं की सुविधा और अधिक से अधिक लोगों को मौका देने के उद्देश्य से निर्वाचन आयोग ने यह फैसला लिया है। अब संशोधन के बाद अंतिम और संशोधित मतदाता सूची 10 अप्रैल को जारी की जाएगी।

निर्वाचन विभाग के अनुसार, SIR का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है। इस प्रक्रिया के तहत नए मतदाताओं का नाम जोड़ना, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाना, तथा नाम, पता, उम्र या फोटो से संबंधित त्रुटियों को ठीक किया जा रहा है। आयोग चाहता है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रहे और अपात्र नाम सूची में न बने रहें।

दावे-आपत्तियों की अवधि बढ़ाए जाने से उन मतदाताओं को राहत मिली है जो किसी कारणवश समय पर आवेदन नहीं कर पाए थे। मतदाता अब अपने संबंधित बूथ लेवल अधिकारी (BLO), तहसील कार्यालय या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी शिकायत या दावा दर्ज करा सकते हैं। ऑनलाइन माध्यम से फॉर्म भरने की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे प्रक्रिया और आसान हो गई है।

चुनाव अधिकारियों का कहना है कि इस दौरान प्राप्त सभी दावों और आपत्तियों की गहन जांच की जाएगी। BLO स्तर पर सत्यापन के बाद ही किसी भी नाम को जोड़ने, हटाने या संशोधित करने का निर्णय लिया जाएगा। इसके बाद ड्राफ्ट लिस्ट में जरूरी बदलाव कर अंतिम मतदाता सूची तैयार की जाएगी, जिसे 10 अप्रैल को प्रकाशित किया जाएगा।

राजनीतिक दलों को भी इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए हैं। वे अपने बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के माध्यम से मतदाता सूची की जांच कर सकते हैं और यदि किसी प्रकार की त्रुटि पाई जाती है तो समय रहते आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। इससे भविष्य के चुनावों में किसी भी तरह के विवाद की संभावना कम होगी।

निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे इस अवसर का पूरा लाभ उठाएं और अपनी जानकारी को सही कराएं। सही और अद्यतन मतदाता सूची ही निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव की आधारशिला होती है।

कुल मिलाकर, SIR के तहत दावे-आपत्तियों की समय-सीमा बढ़ाना एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मजबूत होगी और आगामी चुनावों में मतदाताओं की भागीदारी और विश्वास दोनों बढ़ेंगे।

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