पटना के नामी पारस अस्पताल में गुरुवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब एक अज्ञात हमलावर ने आईसीयू में भर्ती एक मरीज को गोली मार दी। घायल कैदी की पहचान चंदन मिश्रा के रूप में हुई है, जो मेडिकल पैरोल पर अस्पताल में इलाज करा रहा था।
इस घटना ने बिहार की कानून-व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और RJD नेता तेजस्वी यादव ने घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “सरकारी अपराधियों ने ICU में घुसकर मरीज को गोली मार दी। क्या बिहार में कहीं भी कोई सुरक्षित है? क्या ऐसा 2005 से पहले हुआ करता था?”
घटना के बाद पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव मौके पर जाना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें अस्पताल परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया। इसके बाद पप्पू यादव ने प्रेस से कहा, “मैं राज्यपाल से अनुरोध करूंगा कि बिहार में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए। बिहार में अब नर्स सुरक्षित हैं, न डॉक्टर, न आम लोग। यहां अपराधियों को उनकी जाति देखकर चुना जाता है और फर्जी एनकाउंटर किए जाते हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार सरकार अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नहीं, बल्कि भाजपा चला रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि बिहार में प्रशासन नाम की कोई चीज नहीं बची है, और माफियाओं को खुला संरक्षण दिया जा रहा है।
राजद सांसद मनोज कुमार झा ने भी इस मामले पर प्रधानमंत्री से प्रतिक्रिया की मांग करते हुए कहा, “क्या यही कानून का राज है? क्या बिहार अब फैक्ट फाइंडिंग टीम के लायक नहीं है?”
राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था पर कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने भी हमला बोला और कहा, “बिहार में एनडीए शासन के दौरान हत्या, दुष्कर्म और बच्चों के खिलाफ अपराधों में भारी वृद्धि हुई है।”
हालांकि, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने घटना को “आपसी विवाद” बताया और दावा किया कि “घटना के आरोपियों की गिरफ्तारी की जा रही है।”
लेकिन सवाल यह है कि जब राजधानी पटना के ICU तक अपराधी बेधड़क पहुंच रहे हैं, तो आम जनता खुद को कैसे महफूज माने?