हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में सोमवार रात को आसमान से गिरी आफत ने लोगों को दहला दिया। देर रात से शुरू हुई तेज बारिश ने धर्मपुर, सरकाघाट और निहरी इलाकों में जमकर तबाही मचाई। जहां एक ओर धर्मपुर बाजार से होकर बहने वाली सोन खड्ड विकराल रूप धारण कर गई, वहीं दूसरी ओर निहरी क्षेत्र में हुए भूस्खलन ने तीन लोगों की जान ले ली।
सोमवार रात करीब 11 बजे बारिश का दौर शुरू हुआ। देखते ही देखते रात एक बजे बारिश ने विकराल रूप ले लिया। धर्मपुर उपमंडल का पूरा इलाका मानो नदी में तब्दील हो गया। सोन खड्ड का जलस्तर अचानक इतना बढ़ा कि उसने धर्मपुर बस स्टैंड को पूरी तरह जलमग्न कर दिया। यहां खड़ी निगम की बसें पानी में डूब गईं और कुछ बसें तेज बहाव के साथ बह भी गईं।
बस स्टैंड के पास बने घरों और दुकानों में पानी घुस गया। कई निजी वाहन- कार, बाइक और स्कूटर पानी के साथ बह गए। लोगों ने किसी तरह घरों की दूसरी मंजिल और छतों पर चढ़कर अपनी जान बचाई।
धर्मपुर के सबसे भयावह दृश्यों में से एक रहा स्थानीय होस्टल। यहां करीब 150 बच्चे रह रहे थे। अचानक पानी और मलबा अंदर घुस आया। बच्चों ने डर के मारे दूसरी और तीसरी मंजिल पर शरण ली। उनके चेहरों पर दहशत साफ झलक रही थी। राहत की बात रही कि पुलिस और रेस्क्यू टीम समय पर पहुंच गई और बच्चों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने का अभियान शुरू कर दिया।
धर्मपुर डीएसपी संजीव सूद ने बताया कि बारिश तेज होते ही पुलिस और प्रशासन की टीमें अलर्ट हो गई थीं। रात भर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहा। लोगों को घरों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। अभी तक किसी बड़ी जानी हानि की पुष्टि नहीं हुई है, हालांकि एक व्यक्ति के लापता होने की खबर है। प्रशासन उसकी तलाश में जुटा है।
बारिश की इस तबाही के बीच निहरी इलाके से और भी भयावह खबर आई। यहां भारी बारिश के बाद एक पहाड़ी दरक गई और मलबा नीचे बसे एक घर पर जा गिरा। घर पूरी तरह ढह गया। मलबे में दबकर तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य को जख्मी हालत में रेस्क्यू कर बाहर निकाला गया।
एसपी मंडी साक्षी वर्मा ने बताया कि जैसे ही सूचना मिली, पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। राहत-बचाव कार्य जारी है। मलबा हटाने के लिए मशीनरी लगाई गई है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कहीं और ऐसी स्थिति न बने।
धर्मपुर और निहरी की इन घटनाओं ने लोगों को दहला दिया है। रातभर अफरा-तफरी का माहौल रहा। कई परिवारों ने पूरी रात छतों पर गुजारी। दुकानों और मकानों में घुसा मलबा अब साफ नजर आ रहा है। लोग अपने नुकसान का अंदाजा लगाकर मायूस हैं।
मंडी प्रशासन ने बताया कि सोन खड्ड का जलस्तर अब सामान्य हो रहा है, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे तक सतर्क रहने की चेतावनी दी है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि नदी-नालों और खड्डों के किनारे न जाएं। भूस्खलन प्रवण क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें। स्थानीय पुलिस और बचाव दल लगातार गश्त कर रहे हैं। राहत शिविर बनाए गए हैं और प्रभावितों को अस्थायी आश्रय दिया जा रहा है।
धर्मपुर से निहरी तक फैली इस त्रासदी ने एक बार फिर हिमाचल की नाजुक भौगोलिक स्थिति को उजागर कर दिया है। लोगों का कहना है कि उन्होंने ऐसा मंजर पहले कभी नहीं देखा। वाहन बह गए, घरों में पानी भर गया और दुकानों का सामान बर्बाद हो गया।
फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती है लापता लोगों को ढूंढना और प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाना। तीन लोगों की मौत ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है। स्थानीय लोग सरकार से त्वरित मदद और मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
कुदरत के इस कहर ने मंडी को हिला दिया है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन और सरकार भविष्य में ऐसे हादसों से बचाव की कोई ठोस योजना बना पाएंगे या फिर हर बरसात में लोगों को इसी तरह अपनी जान हथेली पर लेकर जीना होगा?