उत्तर प्रदेश में गंगा और यमुना नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। खतरे का निशान करीब आने से प्रयागराज और आसपास के इलाकों में बाढ़ का संकट गहराने लगा है। गंगा का जलस्तर 84 मीटर से ऊपर पहुंच चुका है और यमुना भी इसके करीब है। दोनों नदियों में पानी की बढ़ोतरी रुकने का नाम नहीं ले रही। नतीजा यह है कि दर्जनों बस्तियां पानी से घिर चुकी हैं और हजारों लोगों को एक बार फिर से घर छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है। मुश्किल यह कि दोनों नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी जारी है और टोंस अब भी उफान पर है। ऐसे में बाढ़ का दायरा बढ़ता दिख रहा है।
सिंचाई विभाग की सोमवार शाम चार बजे की रिपोर्ट के अनुसार फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 84.01 मीटर पहुंच गया था। गंगा के जलस्तर में प्रतिघंटे दो सेमी की बढ़ोतरी भी दर्ज की गई। नैनी में यमुना का जलस्तर 83.81 मीटर पहुंच गया और इसमें प्रतिघंटे 1.50 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। दोनों नदियों के खतरे का निशान 84.734 मीटर है। दोनों नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी की रफ्तार कुछ कम जरूर हुई है लेकिन वृद्धि का सिलसिला अभी जारी रहेगा। अफसरों के अनुसार दोनों नदियों के जलस्तर में मंगलवार तक बढ़ोतरी जारी रहने के आसार हैं। इसके अलावा टोंस में ज्यादा पानी आ रहा है। इससे संगम के बाद पानी तेजी से निकल भी नहीं पा रहा है। इससे मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
जलस्तर बढ़ने के साथ बाढ़ का दायरा भी बढ़ता जा रहा है। बघाड़ा, सलोरी, बेली, राजापुर, नेवादा आदि मोहल्लों के कछारी इलाकों में ऊपर तक पानी आ गया है और एक दर्जन से अधिक बस्तियां प्रभावित हैं। गंगा के दोनों तरफ शहर की 13 बस्तियों के हजारों परिवारों को तीसरी बार घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इसका नतीजा रहा कि सोमवार को राजापुर स्थित ऋषिकुल विद्यालय भी बाढ़ राहत शिविर में तब्दील हो गया और शाम तक पौने तीन सौ लोग इसमें पहुंच भी गए। इस तरह अब चार शिविर चालू हो गए हैं और इनमें करीब 250 परिवारों के 1100 से अधिक लोग पहुंचे हैं। इन शिविरों में लोगों के पहुंचने का सिलसिला रात तक जारी रहा। जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इसे देखते हुए दो अन्य शिविर तैयार भी कर दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर इन्हें भी चालू कर दिया जाएगा।