प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को लोकसभा में 'ऑपरेशन सिंदूर' पर चर्चा का जवाब दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किया है। जो लोग आज पूछ रहे हैं कि पीओके वापस क्यों नहीं लिया गया, उन्हें पहले यह बताना चाहिए कि किसकी सरकार ने पाकिस्तान को पीओके पर कब्जा करने का मौका दिया। जवाब स्पष्ट है। जब भी मैं नेहरू जी की चर्चा करता हूं, तो कांग्रेस और उसका पूरा इकोसिस्टम बिलबिला जाता है। पीएम मोदी ने कहा कि मैं एक शेर सुना करता था। लम्हों ने खता की और सदियों ने सजा पाई। आजादी के बाद जो फैसले लिए गए, उनकी सजा देश आज तक भुगत रहा है।
लोकसभा में पीएम मोदी ने कहा कि 1962 और 63 के बीच कांग्रेस के नेता जम्मू-कश्मीर के कुछ इलाकों को छोड़ देने का प्रस्ताव रख रहे थे। वो भी लाइन ऑफ पीस के नाम पर किया जा रहा था। 1966 में कच्छ के रण में इन्होंने ही मध्यस्थता स्वीकार की। एक बार फिर भारत का 800 वर्ग किमी क्षेत्र पाकिस्तान को सौंपा। 1965 में हाजी पीर को कांग्रेस ने लौटा दिया। 1971 में पाकिस्तान का हजारों वर्ग किमी क्षेत्र हमारे पास था। उस दौरान अगर थोड़ा सा विजन होता तो पीओके वापस लेने का निर्णय हो सकता था। कम से कम करतापुर साहिब को भी नहीं ले पाए। 1974 में श्रीलंका को एक द्वीप गिफ्ट में दे दिया। कांग्रेस ने तमिलनाडु के मछुआरों का हक छीन लिया। कांग्रेस सियाचिन से सेना हटाने वाली थी। इनको मौका मिलता तो सियाचिन हमारे पास नहीं होता।
लोकसभा में पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस के लोगों को उनकी डिप्लोमैसी याद दिलाता हूं। 26/11 के बाद कांग्रेस का पाकिस्तान प्रेम नहीं रुका। विदेशी दबाव में हमले के कुछ सप्ताह में ही पाकिस्तान से बात शुरू कर दी गई। कांग्रेस ने एक भी राजदूत को भारत से बाहर नहीं निकाला। देश पर बड़े-बड़े हमले होते रहे लेकिन यूपीए सरकार पाकिस्तान को मोस्ट फेवरेट नेशन का दर्जा देती रही। एक तरफ देश मुंबई हमले का न्याय मांग रहा था, सरकार पाकिस्तान से व्यापार कर रही थी। पाकिस्तान आतंकियों को भेजता रहा, कांग्रेस यहां अमन की आस का मुशायरा करती थी। हमने इसे बंद कर दिया। भारत के हितों को गिरवी रखना कांग्रेस की पुरानी आदत हैं। सिंधु जल संधि इसका उदाहरण है।