लोकसभा में पीएम मोदी ने कहा कि सत्र के प्रारंभ में मैंने सांसदों से कहा था कि यह सत्र भारत के विजयोत्सव का है। यह भारत के गौरव गान का सत्र है। जब मैं विजयोत्सव की बात कर रहा हूं तो कहना चाहूंगा कि ये विजयोत्सव आतंकी ठिकानों को मिट्टी मिलाने का है। यह सिंदूर की सौगंध पूरा करने का है। यह भारत की सेना के शौर्य और साहस की विजयगाथा का है। यह 140 करोड़ भारतीयों की एकता का है। मैं इसी भाव से सदन में भारत का पक्ष रखने आया हूं। जिन्हें भारत का पक्ष नहीं दिखता उन्हें आइना दिखाने के लिए खड़ा हूं। देशवासियों का मुझ पर कर्ज है।
पीएम मोदी ने कहा कि पहलगाम हमला भारत को हिंसा की आग में झोंकने की साजिश थी। देश ने एकता के साथ उस साजिश को नाकाम कर दिया। 22 अप्रैल के बाद मैंने सार्वजनिक रूप से और विश्व को समझाने के लिए अंग्रेजी में कहा था कि हम आतंक को मिट्टी में मिला देंगे। सजा उनके आकाओं को भी होगी। कल्पाना से भी बड़ी सजा मिलेगी। 22 अप्रैल को मैं विदेश से लौटा और आने के बाद मैंने बैठक बुलाई। हमने साफ निर्देश दिए कि आतंकवाद को करारा जवाब देना होगा। ये हमारा राष्ट्रीय संकल्प है। हमें हमारे सैन्य बलों की क्षमता पर विश्वास है। सेना को खुली छूट दे दी गई। कहा गया कि सेना तय करे कि कब, कहां, कैसे, किस प्रकार से हमला करना है।
लोकसभा में पीएम मोदी ने कहा कि हमें गर्व है कि आतंकियों को ऐसी सजा दी कि आज भी आतंक के आकाओं की नींद उड़ी हुई है। हमारी सेना की सफलता का पहला पक्ष है कि पहलगाम हमले के बाद से ही पाकिस्तानी सेना को अंदाजा लग चुका था कि भारत बड़ी कार्रवाई करेगा। उनकी तरफ से परमाणु बम की धमकी के बयान आने लगे थे। भारत ने छह मई की रात और सात मई की सुबह बड़ी कार्रवाई की। पाकिस्तान कुछ नहीं कर पाया। 22 मिनट में 22 अप्रैल का बदला ले लिया। दूसरा पक्ष पाकिस्तान के साथ हमारी लड़ाई कई बार हुई है। लेकिन पहली बार भारत की रणनीति बनी कि जिसमें पहले जहां कभी नहीं गए, वहां हम पहुंचे। पाकिस्तान के कोने-कोने में आतंकी अड्डों को धुआं-धुआं कर दिया।