अवधेश प्रसाद ने हाल ही में संसद में नरेंद्र मोदी के पश्चिम एशिया संकट पर दिए गए बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि देश के नागरिकों को उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री इस गंभीर अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर ठोस और स्पष्ट रणनीति पेश करेंगे, लेकिन उनके भाषण में इस दिशा में कोई ठोस समाधान या कार्ययोजना नजर नहीं आई। अवधेश प्रसाद के अनुसार, जब पूरा देश और संसद इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार की भूमिका जानना चाहता था, तब प्रधानमंत्री का संबोधन अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पाया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में यह स्पष्ट नहीं किया कि भारत इस संकट को कम करने के लिए क्या कदम उठाएगा या किस प्रकार की कूटनीतिक पहल करेगा।
अवधेश प्रसाद ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री का भाषण अधिकतर सामान्य बातों और नैतिक संदेशों तक सीमित रहा, जिसमें व्यावहारिक समाधान या ठोस नीति का अभाव दिखा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लगा मानो प्रधानमंत्री देश को शिक्षा दे रहे हों, न कि एक जटिल और संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय संकट पर मार्गदर्शन कर रहे हों। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब पश्चिम एशिया में लगातार तनाव बना हुआ है और उसका असर वैश्विक राजनीति व अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है, तब भारत जैसे बड़े देश की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
सपा सांसद ने केंद्र सरकार से यह मांग की कि वह इस मुद्दे पर अधिक पारदर्शिता और स्पष्टता दिखाए, ताकि देशवासियों को यह समझ में आए कि भारत की विदेश नीति इस दिशा में क्या रुख अपना रही है। उन्होंने कहा कि संसद एक ऐसा मंच है जहां गंभीर मुद्दों पर ठोस चर्चा और समाधान सामने आना चाहिए, न कि केवल सामान्य भाषण। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है, जहां विपक्ष सरकार से अधिक जवाबदेही और स्पष्ट रणनीति की मांग कर रहा है, जबकि सरकार की ओर से अभी तक इस आलोचना पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।