स्वतंत्रता दिवस 2025 के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से अपने 103 मिनट लंबे संबोधन में एक ऐतिहासिक जिक्र किया राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष और उसके योगदान का। यह पहला मौका है जब किसी प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में सीधे आरएसएस का नाम लिया। पीएम मोदी ने संघ को “दुनिया का सबसे बड़ा NGO” बताते हुए उसकी सेवा, समर्पण और अनुशासन की सराहना की।
पीएम मोदी ने कहा,
“आज से 100 साल पहले एक संगठन का जन्म हुआ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ। संघ के लोग 100 साल से राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं। व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण के संकल्प को लेकर संघ के स्वयंसेवकों ने मातृभूमि के कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित किया है।”
उन्होंने आगे कहा कि देश गर्व करता है कि आरएसएस की यह यात्रा प्रेरणा देती रहेगी और उन सभी स्वयंसेवकों को आदरपूर्वक याद किया जाना चाहिए जिन्होंने राष्ट्रनिर्माण में योगदान दिया है।
पीएम मोदी के इस बयान पर विपक्ष ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और इसे स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसर पर “राजनीतिक संदेश” देने की कोशिश बताया।
आरजेडी नेता मनोज झा ने कहा,
“लाल किले से प्रधानमंत्री को बिना पूर्वाग्रह के बोलना चाहिए, लेकिन हर बार निराशा होती है। आजादी के दिन अगर RSS की भूमिका पर चर्चा होती तो खुशी होती, लेकिन यह भाषण चुनावी मंच जैसा लगा।”
कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने टिप्पणी की,
“RSS पर देश में दो दृष्टिकोण हैं एक हमारा और दूसरा प्रधानमंत्री का। इतना बड़ा मतभेद है कि इसे राष्ट्रीय एकता के दिन नहीं उठाना चाहिए था।”
पीएम मोदी के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वाली बात पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा,
“भाजपा ने कभी धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी रास्ता अपनाने का वादा किया था, लेकिन संघ का रास्ता वैसा नहीं है। ये मुंह से स्वदेशी हैं, मन से विदेशी।”