सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, "देश के जो हालात हैं, वो ये कहते हैं कि संकट भाजपा खुद है। अर्थव्यवस्था किसकी वजह से लड़खड़ाई है? सत्ता में कौन लोग हैं? डॉलर क्यों नीचे जा रहा है या क्यों ऐसी अपील करनी पड़ रही है? ये अपील नहीं है बल्कि उन्होंने पतन का ऐलान किया है.वे लोग हमारी अर्थव्यवस्था को लेकर दावे किया करते थे तो आज क्यों वही अर्थव्यवस्था लड़खड़ा गई है?.
अखिलेश यादव ने देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज देश जिन हालातों से गुजर रहा है, उससे साफ दिखाई देता है कि सबसे बड़ा संकट खुद भाजपा की नीतियां हैं। अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि यदि देश की अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है, महंगाई और बेरोजगारी बढ़ रही है तथा निवेश और बाजार में अस्थिरता दिखाई दे रही है, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
उन्होंने कहा कि केंद्र में भाजपा की सरकार है और पिछले कई वर्षों से वही सत्ता में है, इसलिए अर्थव्यवस्था में आई गिरावट की जवाबदेही भी सरकार को ही लेनी चाहिए। उन्होंने डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और आर्थिक मोर्चे पर सरकार द्वारा लोगों से की जा रही अपीलों को भी निशाने पर लिया। उनका कहना था कि यह सामान्य अपील नहीं बल्कि सरकार की नीतियों की विफलता और आर्थिक पतन का संकेत है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार पहले देश की अर्थव्यवस्था को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बताकर बड़े-बड़े दावे करती थी, लेकिन आज वही अर्थव्यवस्था दबाव में दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि आम जनता महंगाई, बढ़ती कीमतों, रोजगार की कमी और किसानों की परेशानियों से जूझ रही है, जबकि सरकार वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है। सपा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि यदि सरकार की आर्थिक नीतियां सफल होतीं तो आज देश में उद्योगों, व्यापार और रोजगार के अवसरों में गिरावट नहीं आती।
उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि गलत आर्थिक फैसलों, नोटबंदी, जीएसटी की जटिलताओं और योजनाओं के कमजोर क्रियान्वयन के कारण देश की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है। अखिलेश यादव के इस बयान को आगामी राजनीतिक माहौल और विपक्ष की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है, जिसमें भाजपा सरकार को आर्थिक मुद्दों पर घेरने की कोशिश की जा रही है।