कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने ईंधन की कीमतों में फिर से हुई बढ़ोतरी पर कहा,"जब चुनाव हो रहे थे तब सरकार ने इसकी भनक लगने नहीं दी और चुनाव के परिणाम आने के बाद लगातार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ गए हैं। आज फिर बढ़ोतरी की है तो ये जो जनता पर बोझ डालना था तो इसे पहले बताकर करते तो क्या दिक्कत थी? पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से सभी चीज़ों के दाम बढ़ते हैं महंगाई पर सरकार का कोई ध्यान नहीं है और मुझे लगता है उनका एक एजेंडा है चुनाव जीते और विपक्ष को पताड़ित करें.जनता को जो दिक्कते आ रही हैं उसकी सरकार को चिंता नहीं है विपक्ष एकजुट है हम लगातार अंदोलन करेंगे
शिवसेना UBT नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने ईंधन की कीमतों में फिर से हुई बढ़ोतरी पर कहा,"आज चौथी बार पेट्रोल-डीजल की बढ़ोतरी हुई है। ये वही है हमने तब तक कीमत में बढ़ोतरी नहीं देखी जब तक चुनाव चल रहे थे चुनाव के बाद लगातार कीमत में बढ़ोतरी हो रही है.अब जब जनता पर भार पड़ रहा है महंगाई की मार पड़ रही है और कमी चल रही है तो ये जनता पर और भार डाल रही है ये दुर्भाग्यपूर्ण हैं और दिखा रहा है कि ये सरकार की नीति और नीयत सिर्फ चुनाव जीतने की है जनता को दिक्कत हो रही है इससे उन्हें कोई लेना देना नहीं है।"
देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से आम जनता की चिंता बढ़ गई है। पिछले 10 दिनों के भीतर चौथी बार ईंधन के दाम बढ़ाए जाने के बाद परिवहन से लेकर घरेलू बजट तक पर इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। तेल कंपनियों द्वारा की गई इस ताजा बढ़ोतरी के बाद कई शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें नए स्तर पर पहुंच गई हैं। लगातार बढ़ती कीमतों के कारण लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों पर अधिक खर्च करना पड़ रहा है, जबकि माल ढुलाई महंगी होने से खाद्य पदार्थों और अन्य वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।
सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी के कारण ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की मांग बढ़ने, उत्पादन में कटौती और भू-राजनीतिक तनाव जैसे कारणों का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ रहा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव का सीधा प्रभाव घरेलू ईंधन दरों पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दामों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
लगातार बढ़ती कीमतों का सबसे अधिक असर मध्यम वर्ग, नौकरीपेशा लोगों और परिवहन क्षेत्र पर पड़ रहा है। निजी वाहन चलाने वाले लोगों का मासिक खर्च बढ़ गया है, वहीं बस, ट्रक और टैक्सी संचालकों पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है। कई राज्यों में विपक्षी दलों ने ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की है और टैक्स कम करने की मांग उठाई है। विपक्ष का कहना है कि पेट्रोल और डीजल पर लगाए गए करों के कारण जनता को अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुसार कीमतों में बदलाव स्वाभाविक है और जनता को राहत देने के लिए समय-समय पर कदम उठाए जाते रहे हैं।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार ईंधन की बढ़ती कीमतें महंगाई दर को भी प्रभावित कर सकती हैं। परिवहन लागत बढ़ने से फल, सब्जियां, अनाज और अन्य आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं। ऐसे में आम लोगों को आने वाले समय में और अधिक आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है। जनता अब सरकार से राहत की उम्मीद कर रही है ताकि बढ़ती महंगाई के बीच उन्हें कुछ सहारा मिल सके।