वरिष्ठ पत्रकार समीर चौगांवकर ने कहा कि सद के साल में तीन ही सत्र होते हैं। बजट, मानसून और शीतकालीन सत्र होता है। ये सब मिलाकर एक महीने के करीब होता है। इस साल में एक महीने भी संसद में सांसद सार्थक बहस नहीं कर सकें तो क्या कहा जा सकता है। मुझे लगता है कि यह दोनों पक्षों का काम है कि संसद चले। सत्र चलाने में सरकार की बड़ी भूमिका होती है। विपक्ष को ज्यादा चिंता होनी चाहिए कि सत्र चले। वो सदन में ऐसे मुद्दे लेकर आ सकता है, जिससे सरकार एक्सपोज हो जाए, लेकिन सिर्फ हंगामा करने से कुछ नहीं निकलेगा। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को इसे लेकर गंभीरता से चर्चा करने की जरूरत है।