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Pakistan-Saudi Arabia defence deal: Pakistan को मिला सऊदी अरब का साथ, भारत ने दिया तगड़ा जवाब | World

Thu, 18 Sep 2025 02:16 PM IST
तन्मय बरनवाल वीडियो डेस्क, अमर उजाला

इस साल मई में भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन तक चले सैन्य संघर्ष के चार महीने बाद पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ एक रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई और 'ऑपरेशन सिंदूर' से घबराए पाकिस्तान ने अब दूसरों के सामने अपनी सुरक्षा के लिए मदद की भीख मांगना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान-सऊदी अरब के एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि दोनों देशों में से किसी के भी विरुद्ध किसी भी तरह के हमले को अब से दोनों के विरुद्ध आक्रमण माना जाएगा. और इस आक्रमण का जवाब पाकिस्तान और सऊदी अरब मिलकर देंगे. इस समझौते पर सऊदी अरब के शहजादे मोहम्मद बिन सलमान अब्दुलअजीज अल सऊद और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हस्ताक्षर किए हैं.

पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए रणनीतिक रक्षा समझौते के एक दिन बाद, भारत ने गुरुवार को कहा कि वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय एवं वैश्विक स्थिरता पर इस समझौते के प्रभावों का अध्ययन करेगा. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस मामले में अपनी संतुलित प्रतिक्रिया में कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा और ‘सभी क्षेत्रों में व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा’ के लिए प्रतिबद्ध है. जायसवाल ने कहा, ‘‘हमने सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच एक रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर की खबरें देखी हैं. उन्होंने कहा, ‘‘सरकार को इस बात की जानकारी थी कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही इस व्यवस्था को औपचारिक रूप देने वाले इस घटनाक्रम पर विचार किया जा रहा है.’’ जायसवाल ने कहा कि भारत ‘‘इस घटनाक्रम के हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करेगा.’’ उन्होंने कहा, ‘‘सरकार भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा और सभी क्षेत्रों में व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है.’’

रियाद में हुए हस्ताक्षर समारोह के बाद जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया, लगभग आठ दशकों से चली आ रही साझेदारी को आगे बढ़ाते हुए और भाईचारे, इस्लामी एकजुटता और साझा रणनीतिक हितों के बंधनों पर आधारित दोनों पक्षों ने रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. इससे पहले सऊदी राजधानी पहुंचने पर प्रधानमंत्री शरीफ का जोरदार स्वागत किया गया.यह समझौता दोनों देशों के बीच सुरक्षा साझेदारी में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच रक्षा सहयोग दशकों से मौजूद है. अब इस व्यवस्था की औपचारिकता यह सवाल उठाती है कि आखिर यह समझौता दक्षिण एशिया के रणनीतिक माहौल को कैसे प्रभवित करेगा. विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान के रक्षा गठबंधन में किसी भी तरह का बदलाव संभावित रूप से क्षेत्रीय सुरक्षा और राजनयिक जुड़ाव को प्रभावित कर सकता है.पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच ऐतिहासिक संबंध हैं, जो साझा आस्था, मूल्यों और आपसी विश्वास पर आधारित हैं। विदेश कार्यालय ने प्रधानमंत्री की तेल-समृद्ध सऊदी अरब यात्रा से पहले कहा था कि यह यात्रा दोनों नेताओं को इस अनूठी साझेदारी को और मज़बूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगी, साथ ही दोनों देशों के लोगों के लाभ के लिए सहयोग के नए रास्ते तलाशने का भी अवसर प्रदान करेगी।

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