बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, राजनीतिक हलचलें तेज होती जा रही हैं। सीटों को लेकर लंबे समय से चली आ रही चर्चाओं के बीच अब राजग (एनडीए) में सीट बंटवारे का फार्मूला लगभग तय हो गया है। भाजपा और जदयू के बीच संतुलन साधते हुए यह तय हुआ है कि भाजपा 101 सीटों और जदयू 102 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। शेष 40 सीटें एनडीए के अन्य सहयोगियों लोजपा (रामविलास), हम (हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा) और आरएलएम (राष्ट्रीय लोकमत पार्टी) को दी जाएंगी।
एनडीए के भीतर सबसे बड़ी बहस भाजपा और जदयू के बीच सीटों को लेकर रही। पिछले चुनाव के अनुभव को देखते हुए दोनों दलों ने बराबर की हिस्सेदारी के फार्मूले पर सहमति जताई है। नतीजतन भाजपा 101 और जदयू 102 सीटों पर मैदान में उतरेगी। इस फार्मूले से दोनों दलों को यह संदेश देने का मौका मिलेगा कि गठबंधन में संतुलन कायम है और कोई दल दूसरे पर हावी नहीं है।
अब असली चुनौती शेष 40 सीटों के बंटवारे की है। भाजपा चाहती है कि इन सीटों में से 25 सीटें लोजपा (आर) को दी जाएं, जबकि आठ से दस सीटें हम और पांच सीटें आरएलएम को मिलें। लेकिन यह बात उतनी आसान नहीं है।
• चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (आर) कम से कम 40 सीटों की मांग पर अड़ी है।
• जीतनराम मांझी की पार्टी हम एक दर्जन सीटें चाहती है।
• आरएलएम भी अपने प्रभाव वाले इलाकों में अधिक सीटों की मांग रख रही है।
सूत्रों के अनुसार, भाजपा और जदयू दोनों दल चाहते हैं कि सीट बंटवारे पर जल्द से जल्द सहमति बने ताकि चुनावी तैयारियों में कोई अड़चन न आए।
भाजपा ने टिकट बंटवारे की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। पटना में हुई दो दिवसीय कोर ग्रुप बैठक में जिलावार टिकट के दावेदारों की समीक्षा की गई। सभी 243 सीटों के लिए करीब 6,000 दावेदारों ने बायोडाटा दिया है। केंद्रीय नेतृत्व ने हर सीट पर अधिकतम पांच उम्मीदवारों का पैनल बनाने का निर्देश दिया है।
हालांकि अंतिम फैसला चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद ही होगा। सीट बंटवारे और उम्मीदवारों की घोषणा अधिसूचना आने के साथ ही सामने लाई जाएगी।
एनडीए के भीतर भाजपा की सबसे बड़ी चिंता चिराग पासवान को साधे रखना है। भाजपा मानती है कि लोजपा (आर) का वोट बैंक, खासकर दलित समाज और युवाओं के बीच, चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकता है।
भाजपा सूत्रों के मुताबिक, चिराग की ओर से अधिक सीटों की मांग कार्यकर्ताओं को उत्साहित करने की रणनीति का हिस्सा है। अगर बात नहीं बनी, तो भाजपा अपने हिस्से की कुछ सीटें छोड़कर उन्हें दे सकती है। ऐसे में इन सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार लोजपा (आर) के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं।
यह फार्मूला भाजपा पहले भी आजमा चुकी है। बीते चुनाव में उसने वीआईपी पार्टी को 11 सीटें दी थीं, जिनमें से छह सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार लड़े थे। बाद में वीआईपी के चार विधायक भाजपा में शामिल हो गए। यही मॉडल अब चिराग पासवान के लिए भी अपनाया जा सकता है।
एनडीए के लिए यह सीट बंटवारा सिर्फ गणित नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश है। भाजपा और जदयू बराबरी का हिस्सा लेकर गठबंधन की मजबूती दिखाना चाहती हैं। वहीं, लोजपा (आर) को पर्याप्त सीटें देकर उसे नाराज होने से बचाना और महागठबंधन की ओर जाने से रोकना भाजपा का अहम एजेंडा है।
जीतनराम मांझी और उनकी पार्टी हम को भी संतुलित सीटें देकर एनडीए दलित और महादलित वोट बैंक को अपने साथ मजबूती से बनाए रखना चाहती है। आरएलएम को मिलने वाली सीटें कम होंगी, लेकिन उन्हें भी सम्मानजनक जगह दी जाएगी ताकि गठबंधन की एकता पर कोई सवाल न उठे।
बिहार चुनाव में एनडीए ने सीट बंटवारे का खाका तैयार कर लिया है। भाजपा 101 और जदयू 102 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी, जबकि शेष 40 सीटें सहयोगियों में बंटेंगी। चिराग पासवान की सीट मांग पर पेच अभी बाकी है, लेकिन भाजपा किसी भी हालत में उन्हें साधे रखने की रणनीति पर काम कर रही है।
अब नजर चुनाव की अधिसूचना पर है। अधिसूचना जारी होते ही उम्मीदवारों और सीट बंटवारे की आधिकारिक घोषणा होगी। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि एनडीए का यह फार्मूला जमीनी हकीकत में कितना कारगर साबित होता है और क्या यह महागठबंधन के लिए कड़ी चुनौती पेश कर पाता है।