दशहरे के अवसर पर छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में 103 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। यह छत्तीसगढ़ के इतिहास में एक ही दिन में नक्सलियों का अब तक का सबसे बड़ा आत्मसमर्पण माना जा रहा है। नक्सलियों ने माओवादी विचारधारा से मोहभंग और सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव और मुठभेड़ों में मारे जाने के डर को आत्मसमर्पण का मुख्य कारण बताया है। साथ ही, वे बस्तर क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों से भी प्रभावित हुए।
यह आत्मसमर्पण "पूना मारगेम" (पुनर्वास से पुनर्जीवन) अभियान से प्रेरित होकर हुआ है। इतनी बड़ी संख्या में नक्सलियों के आत्मसमर्पण को माओवादी संगठन CPI (Maoist) के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। सरेंडर करने वालों में डीवीसीएम (DVCM), पीपीसीएम (PPCM), एसीएम (ACM), एरिया कमेटी सदस्य, मिलिशिया और डिप्टी कमांडर रैंक के नक्सली भी शामिल थे, जो संगठन के लिए महत्वपूर्ण थे।
आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को छत्तीसगढ़ सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के तहत सहायता प्रदान की जाएगी। उन्हें मुख्यधारा में लौटने और शांतिपूर्ण जीवन जीने का अवसर दिया जाएगा। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रत्येक आत्मसमर्पित नक्सली को तत्काल सहायता के तौर पर 50,000 रुपये का चेक प्रदान किया गया है। यह घटना छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियानों और सरकार की आत्मसमर्पण नीति की एक बड़ी सफलता है।एसपी बीजापुर डॉ. जीतेन्द्र कुमार यादव ने बताया, "आज 103 माओवादियों ने बीजापुर पुलिस और CRPF के समक्ष आत्मसमर्पण किया, जिनपर कुल मिलाकर 1.06 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था।
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, क्षेत्र में नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना के आधार पर सुरक्षाबलों ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया था। इसी दौरान गुरुवार की सुबह करीब 11 बजे से गंगालूर थाना क्षेत्र में नक्सलियों और सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम के बीच रुक-रुक कर फायरिंग शुरू हो गई, जो अब तक जारी है।
पुलिस ने बताया कि मुठभेड़ स्थल से एक नक्सली का शव बरामद किया गया है। साथ ही मुठभेड़ स्थल से हथियार और बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री भी मिली है। यह ऑपरेशन अभी भी जारी है।
सुरक्षा कारणों से फिलहाल मुठभेड़ के स्थान, ऑपरेशन में शामिल बलों की संख्या और अन्य संवेदनशील जानकारियों को साझा नहीं किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन खत्म होने के बाद पूरी जानकारी साझा की जाएगी।