तेलंगाना के हैदराबाद में 72 फीट की इको फ्रेंडली दुर्गा प्रतिमा चर्चा का विषय बनी हुई है। इस प्रतिमा को देखने के लिए लोग दूर- दूर से आ रहे हैं। इसके आयोजक गुलाब श्रीनिवास ने बताया, "यह पूरी तरह से इको फ्रेंडली मूर्ति है। इसमें घास, पानी और मिट्टी का इस्तेमाल किया गया है। 45 दिन में 26 कारीगरों ने इसे तैयार किया है। यह 72 फुट ऊंची है। माता के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।" श्री नव दुर्गा नवरात्रि उत्सव समिति, कोठी, हैदराबाद द्वारा स्थापित की गई एक विशाल इको-फ्रेंडली दुर्गा मूर्ति के बारे में जानकारी जो दी गई है उसके मुताबिक ऊंचाई अलग-अलग वर्षों में बढ़ी है और जिसने रिकॉर्ड भी बनाए हैं
हाल के वर्षों में ऊंचाई: यह मूर्ति पहले 55 फीट (2023 में) और फिर 65 फीट (2024 में) तक बढ़ चुकी है। 65 फीट की ऊंचाई पर इसे हाई रेंज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा दुनिया की सबसे ऊंची इको-फ्रेंडली दुर्गा मूर्ति के रूप में मान्यता मिली थी। हो सकता है कि 72 फुट की बात इसी श्रृंखला की आगामी या एक और विशाल मूर्ति से संबंधित हो, लेकिन फिलहाल 65 फुट की मूर्ति की पुष्टि की गई है। यह मूर्ति आमतौर पर विक्ट्री प्ले ग्राउंड के पास कोठी/एसामिया बाज़ार, हैदराबाद में स्थापित की जाती है।
यह मूर्ति पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल सामग्री का उपयोग करके बनाई गई है। इसके निर्माण में मुख्य रूप से घास, नारियल की जटा , और लाल मिट्टी जैसी प्राकृतिक सामग्री का उपयोग किया जाता है। इसे बनाने के लिए पश्चिम बंगाल के कारीगरों को बुलाया जाता है। इस विशाल मूर्ति को बनाने में लगभग 35 दिन का समय लगा था, जिसमें पश्चिम बंगाल के 28 कारीगरों की टीम लगी थी। यह मूर्ति देवी दुर्गा के महा षष्ठी दुर्गा देवी माता रूप को दर्शाती है, जिनके 10 हाथ और एक उग्र अभिव्यक्ति होती है। नौ दिनों के उत्सव के दौरान, मुख्य मूर्ति के बगल में एक और छोटी, पाँच फुट की मूर्ति स्थापित की जाती है, जिसे प्रतिदिन एक नई साड़ी पहनाई जाती है, जो देवी के नौ रूपों का प्रतिनिधित्व करती है।