मान्यता के अनुसार देव शयनी एकादशी से चार माह के लिए भगवान विष्णु पाताल लोक में राजा बलि के यहां विश्राम करने चले जाते हैं। तब पृथ्वी लोक की सत्ता शिवजी के पास होती है। फिर जब देव उठनी एकादशी पर विष्णुजी जागते हैं तब बैकुंठ चतुर्दशी के दिन शिवजी यह सत्ता पुनः विष्णुजी को सौंपकर कैलाश पर्वत पर तपस्या के लिए लौट जाते हैं। इसी परंपरा को हरि-हर मिलन कहते हैं।