यह चर्चा तेज है कि मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला मंत्रिमंडल विस्तार फिलहाल टल सकता है और इसकी टाइमिंग संसद के मानसून सत्र के बाद तय हो सकती है। राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि सरकार इस समय मंत्रिमंडल फेरबदल से ज्यादा संसद में अहम संवैधानिक प्रस्तावों और बड़े विधेयकों के लिए जरूरी समर्थन जुटाने पर फोकस कर रही है। इसी वजह से क्षेत्रीय दलों के साथ संवाद और संसदीय रणनीति को प्राथमिकता दी जा रही है।
वहीं लोकसभा और राज्यसभा के बदलते समीकरणों ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। कई दलों के भीतर हुए बदलावों के बाद एनडीए अपने संख्या बल को मजबूत करने की कोशिश में जुटा दिखाई दे रहा है। अब नजरें मानसून सत्र पर हैं, जहां यह साफ हो सकता है कि सरकार पहले राजनीतिक गणित साधती है या फिर मंत्रिमंडल विस्तार का रास्ता खोलती है।