शिया धर्मगुरु मौलाना सैफ अब्बास कहते हैं, "चुनाव आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया शुरू की है। मेरा मानना है कि किसी को भी यह भ्रम पालने की ज़रूरत नहीं है और न ही पालना चाहिए कि उनका वोट कट जाएगा. मेरे पिता और माता, जिनका नाम 2003 की सूची में था, दोनों का निधन हो चुका है, लेकिन उनके नाम अभी भी सूची में हैं। अब ये नाम हटाए जा रहे हैं। साथ ही, मेरे बेटे का नाम सूची में नहीं था, इसलिए उसका नाम जोड़ा जा रहा है. इसलिए, यह प्रक्रिया संख्या कम करने के लिए नहीं, बल्कि संख्या बढ़ाने के लिए शुरू की गई है. मैं अपील करना चाहूंगा कि जनता को समय दिया जाना चाहिए क्योंकि हमारे किसान अभी विभिन्न फसलों की बुवाई में व्यस्त हैं, इसलिए उन्हें इस प्रक्रिया में पूरी तरह से भाग लेने के लिए कुछ समय दिया जाना चाहिए।
लखनऊ के प्रमुख शिया धर्मगुरु मौलाना सैफ अब्बास ने विशेष मतदाता पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि SIR की प्रक्रिया वोट काटने के लिए नहीं, बल्कि वोट जोड़ने और सुधारने के लिए है।
मौलाना ने कहा कि सोशल मीडिया और आम जनता में यह गलत धारणा फैलाई जा रही है कि SIR के नाम पर वोट काटे जा रहे हैं, लेकिन यह पूरी तरह से गलत और भ्रामक है। उन्होंने कहा कि SIR के खिलाफ जानबूझकर भ्रम और अफवाहें फैलाने की कोशिश की जा रही है ताकि लोगों में दहशत पैदा हो सके।
उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग यह प्रक्रिया इसलिए कर रहा है ताकि वोटर लिस्ट और अधिक शुद्ध और अपडेट हो सके। SIR का मुख्य उद्देश्य मतदाताओं की संख्या कम करना नहीं है, बल्कि सही मतदाताओं को जोड़ना, वोटर लिस्ट में आई पुरानी गलतियों को ठीक करना और मृतक या शिफ्ट हो चुके लोगों के नाम हटाना है।
मौलाना सैफ अब्बास ने जनता से अपील की है कि वोटर लिस्ट का रिफाइन होना बहुत जरूरी है, इसलिए वे किसी तरह की दहशत या गलतफहमी में न आएं। उन्होंने प्रदेश की जनता को यह नसीहत भी दी है कि वे चल रही इस प्रक्रिया की अंतिम तिथि (शायद 4 दिसंबर) से पहले अपना SIR का फॉर्म भर दें ताकि उनका नाम वोटर लिस्ट में शामिल हो सके। उन्होंने कहा कि अगर आप सक्रिय हैं और बीएलओ के आने पर फॉर्म भरते हैं तो आपका वोट निश्चित रूप से ऐड होगा।