शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बृहस्पतिवार को भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाया कि वह नगर निगम चुनावों से पहले उनके चचेरे भाई राज ठाकरे की अगुवाई वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के साथ उनकी पार्टी के गठबंधन की संभावना को विफल करने की कोशिश कर रही है।दिवंगत बाल ठाकरे द्वारा गठित अविभाजित शिवसेना के 59वें स्थापना दिवस के अवसर पर एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने सत्तारूढ़ पार्टी को चेतावनी दी कि अगर उसने ‘ठाकरे ब्रांड’ को नुकसान पहुंचाया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उद्धव ने कहा कि मराठी दलों के गठबंधन की संभावना को विफल करने के लिए होटलों और अन्य जगहों पर बैठकें की जा रही हैं। वह जाहिर तौर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ राज ठाकरे की शहर के एक पांच सितारा होटल में हाल ही में हुई बैठक का जिक्र कर रहे थे। वहीं शिवसेना नेता शाइना एनसी ने कहा, "राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे दोनों ही महाराष्ट्र के स्कूलों में हिंदी को अनिवार्य बनाने के खिलाफ 5 जुलाई को एकजुट मार्च निकालेंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार भाषा सीखना वैकल्पिक रहना चाहिए और इसका राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।" 'ठाकरे ब्रांड' के बारे में वे कहती हैं, "यह जनता को तय करना है, व्यक्तियों को दावा नहीं करना है।"
अटकलें हैं कि मुंबई और राज्य के अन्य हिस्सों में निकाय चुनाव के मद्देनजर दोनों ठाकरे चचेरे भाई गठबंधन कर सकते हैं।इस बीच, पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य में हिंदी को किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने मुंबई निकाय पर पार्टी का कब्जा बरकरार रहने का भरोसा जताते हुए कहा कि भाजपा निकाय चुनावों की पूर्व संध्या पर मराठी और हिंदी भाषी लोगों के बीच विभाजन पैदा करना चाहती है।
वहीं, राज्य सरकार का साफ कहना है कि विपक्ष गलत प्रोपोगेंडा फैला रहा है, जबकि सरकार मराठी के साथ है. मराठी ही राज्य की प्रथम भाषा थी है और रहेगी. राज्य के सभी स्कूलों में मराठी भाषा को अनिवार्य किया गया है. केंद्र सरकार द्वारा मराठी को अभिजात (क्लासिकल) भाषा का दर्जा दिया गया है, जिससे इसका महत्व कभी भी कम नहीं होगा. अंग्रेज़ी को केवल द्वितीय भाषा के रूप में स्वीकार किया गया है, लेकिन मराठी सभी माध्यमों के स्कूलों में अनिवार्य रूप से पढ़ाई जाएगी.
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत राज्य सरकारों को अपने स्तर पर निर्णय लेने की स्वतंत्रता दी गई है. नीति के अनुसार, 2 से 8 वर्ष की उम्र के बच्चों को भाषा जल्दी समझ आती है, इसलिए केंद्र सरकार ने मातृभाषा को प्राथमिकता देने की सिफारिश की है. अगर कोई छात्र तीसरी भाषा सीखना चाहता है, तो सरकार की ओर से शिक्षक उपलब्ध कराए जाएंगे.शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने कहा “राज्य के सभी स्कूलों में मराठी भाषा को अनिवार्य किया गया है. केंद्र सरकार द्वारा मराठी को अभिजात (क्लासिकल) भाषा का दर्जा दिया गया है, जिससे इसका महत्व कभी भी कम नहीं होगा. अंग्रेजी को केवल द्वितीय भाषा के रूप में स्वीकार किया गया है, लेकिन मराठी सभी माध्यमों के स्कूलों में अनिवार्य रूप से पढ़ाई जाएगी. ”
उन्होंने कहा किकुछ स्कूलों में अन्य भाषाएं भी सिखाई जाती हैं, लेकिन राज्य सरकार ने किसी भी भाषा को तीसरी भाषा के रूप में थोपने का काम नहीं किया है. छात्र या उनके परिवार अपनी रुचि के अनुसार तीसरी भाषा का चयन कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत राज्य सरकारों को अपने स्तर पर निर्णय लेने की स्वतंत्रता दी गई है. नीति के अनुसार, 2 से 8 वर्ष की उम्र के बच्चों को भाषा जल्दी समझ आती है, इसलिए केंद्र सरकार ने मातृभाषा को प्राथमिकता देने की सिफारिश की है. अगर कोई छात्र तीसरी भाषा सीखना चाहता है, तो सरकार की ओर से शिक्षक उपलब्ध कराए जाएंगे.