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LPG Cylinder Price Hike: घरेलू गैस सिलेंडर के फिर बढ़े दाम, भड़की कांग्रेस मोदी सरकार पर बोला हमला

Mon, 08 Jun 2026 03:30 AM IST
Bhaskar Tiwari वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम

घरेलू LPG की कीमतों में बढ़ोतरी पर कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा, "पेट्रोल, डीजल और LPG के दाम बढ़ाकर ये सरकार क्यों लोगों पर दबाव डाल रही है? सरकारी कंपनियां मुनाफा कमाएं और लोगों की जेब से आप पैसा निकालें ये तानाशाही है। इसके खिलाफ पूरे देश को एकजुट होने की जरूरत है। लोगों की जेब से पैसा निकालकर अपनी तिजोरी भरना कोई शासन करना नहीं है।"

घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। तीन महीने के भीतर दूसरी बार एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। तेल विपणन कंपनियों ने घरेलू उपयोग वाले 14.2 किलोग्राम के गैस सिलेंडर के दाम में 29 रुपये की वृद्धि की है। इस बढ़ोतरी के बाद देश के विभिन्न शहरों में घरेलू गैस सिलेंडर की नई कीमतें लागू हो गई हैं। सरकार और तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में उतार-चढ़ाव, परिवहन लागत तथा अन्य परिचालन खर्चों के कारण समय-समय पर कीमतों में संशोधन किया जाता है। हालांकि, आम उपभोक्ताओं के लिए यह बढ़ोतरी घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ डालने वाली साबित हो रही है।

नई दरों के अनुसार राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 29 रुपये बढ़कर पहले की तुलना में अधिक हो गई है। इसी तरह मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, लखनऊ, पटना, जयपुर और अन्य प्रमुख शहरों में भी गैस सिलेंडर के दाम बढ़े हैं। कीमतों में यह वृद्धि ऐसे समय हुई है जब पहले से ही खाद्य पदार्थों, बिजली, परिवहन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की लागत बढ़ रही है। रसोई गैस हर परिवार की दैनिक जरूरत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए इसकी कीमत में मामूली वृद्धि भी सीधे तौर पर घर के मासिक खर्च को प्रभावित करती है। विशेष रूप से मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों को इसका अधिक असर महसूस होगा।

पिछले तीन महीनों में यह दूसरी बार है जब घरेलू गैस सिलेंडर महंगा हुआ है। इससे पहले भी कीमतों में वृद्धि की गई थी, जिसके बाद उपभोक्ताओं को राहत की उम्मीद थी, लेकिन अब फिर से बढ़ोतरी होने से लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। कई उपभोक्ताओं का मानना है कि लगातार बढ़ती कीमतों के कारण घरेलू बजट का संतुलन बिगड़ रहा है। वहीं, सरकार द्वारा उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को दी जाने वाली सब्सिडी कुछ हद तक राहत प्रदान करती है, लेकिन सामान्य उपभोक्ताओं को बढ़ी हुई कीमत का पूरा भुगतान करना पड़ता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में स्थिरता नहीं आती है, तो भविष्य में भी गैस की कीमतों में बदलाव संभव है। इसलिए उपभोक्ताओं को अपने घरेलू खर्च की योजना बनाते समय इस अतिरिक्त लागत को ध्यान में रखना होगा। कुल मिलाकर, 29 रुपये की यह बढ़ोतरी भले ही देखने में छोटी लगे, लेकिन करोड़ों परिवारों के लिए यह बढ़ती महंगाई का एक और उदाहरण है, जो उनकी मासिक आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकती है।

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