देश में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति को लेकर फिलहाल किसी तरह की बड़ी समस्या सामने नहीं आ रही है, लेकिन रसोई गैस यानी एलपीजी की उपलब्धता और कीमतों को लेकर चिंता लगातार बनी हुई है। इसी मुद्दे को लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं और आम जनता की परेशानियों को प्रमुखता से उजागर करने की कोशिश की है। कांग्रेस का कहना है कि जहां एक ओर सरकार पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति को लेकर आश्वस्त करती नजर आ रही है, वहीं दूसरी ओर एलपीजी सिलेंडर की कीमतें आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। पार्टी नेताओं का आरोप है कि घरेलू गैस पर सब्सिडी में कटौती और कीमतों में लगातार वृद्धि के कारण गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के बजट पर सीधा असर पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीण इलाकों में एलपीजी की नियमित आपूर्ति नहीं हो पाने के कारण लोग फिर से पारंपरिक ईंधन जैसे लकड़ी और कोयले की ओर लौटने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि एलपीजी सिलेंडर की कीमतों को नियंत्रित किया जाए और जरूरतमंदों को पर्याप्त सब्सिडी दी जाए ताकि उज्ज्वला जैसी योजनाओं का वास्तविक लाभ लोगों तक पहुंच सके। इसके अलावा पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि यदि देश में कच्चे तेल की कीमतों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उतार-चढ़ाव होता है, तो उसका सीधा बोझ केवल उपभोक्ताओं पर ही क्यों डाला जाता है। सरकार की ओर से हालांकि यह तर्क दिया जाता रहा है कि वैश्विक बाजार की परिस्थितियों और आयात लागत के कारण कीमतों में बदलाव अपरिहार्य है, लेकिन विपक्ष का कहना है कि टैक्स संरचना में बदलाव कर जनता को राहत दी जा सकती है। इस पूरे विवाद के बीच आम जनता की चिंता सबसे अधिक एलपीजी सिलेंडर को लेकर ही बनी हुई है, क्योंकि यह सीधे तौर पर उनके दैनिक जीवन और रसोई खर्च से जुड़ा हुआ है, जबकि पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता फिलहाल स्थिर बनी हुई है।