‘वह आदमी चला गया नया गरम कोट पहिनकर विचार की तरह’, ‘सब कुछ होना बचा रहेगा’, ‘आकाश धरती को खटखटाता है’, और ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’… जैसी रचनाएं लिखने वाले मशहूर वरिष्ठ कवि और कथाकार विनोद कुमार शुक्ल नहीं रहे. अपनी जादुई लेखन शैली के लिए मशहूर विनोद कुमार शुक्ल का 88 साल की उम्र में निधन हो गया. रायपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने उनके निधन की पुष्टि की है. वे पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थे और अस्पताल में भर्ती थे. लेखन और जीवन के समग्र अवदान के लिए अमर उजाला का सर्वोच्च शब्द सम्मान 'आकाशदीप' हिंदी में प्रख्यात रचनाकार विनोद कुमार शुक्ल दिया गया।