मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भागीरथपुरा में दूषित पानी के मामले पर कहा, "इंदौर नगर निगम में जिस तरह का भ्रष्टाचार हुआ है, उससे 16 लोगों की मौत हो गई। यहां के प्रभारी मंत्री मोहन यादव इसके लिए मुख्य रूप से ज़िम्मेदार हैं। वह सबसे ज़्यादा दोषी हैं; उन्होंने प्रभारी मंत्री के तौर पर यहां एक भी मीटिंग नहीं की। उन्होंने इंदौर को भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया। शहरी प्रशासन मंत्री को इस्तीफ़ा देना चाहिए, और जवाबदेही तय होनी चाहिए... जो लोग इसके लिए ज़िम्मेदार थे, उनके खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला क्यों नहीं दर्ज किया जाना चाहिए?.हमारा दायित्व है कि हम इंदौर से आह्वान करें कि आइए इस अहंकार को मिटाइए, हम 11 जनवरी को मार्च करेंगे।"
इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई हालिया घटना (विशेष रूप से जून 2024 के दौरान) एक गंभीर स्वास्थ्य संकट के रूप में सामने आई थी। यह मामला मुख्य रूप से शहर के बाली नगर, वीर सावरकर नगर और द्वारकापुरी जैसे क्षेत्रों में केंद्रित था। जांच में पाया गया कि नगर निगम की पेयजल पाइपलाइन में ड्रेनेज (निकासी) का गंदा पानी मिल जाने के कारण आपूर्ति जहरीली हो गई थी। इस दूषित पानी के सेवन से सैकड़ों लोग उल्टी-दस्त, पेट दर्द और गंभीर डिहाइड्रेशन का शिकार हुए। स्थिति तब और बिगड़ गई जब इस प्रकोप के कारण कुछ लोगों की दुखद मृत्यु हो गई और दर्जनों लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि पानी की पाइपलाइन कई जगह से ड्रेनेज लाइन के संपर्क में थी। स्थानीय निवासियों ने काफी समय से गंदे और बदबूदार पानी की शिकायत की थी, जिसे समय रहते ठीक नहीं किया गया।
घटना के बाद इंदौर नगर निगम (IMC) और जिला प्रशासन हरकत में आया। मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों के बाद संबंधित क्षेत्र के जिम्मेदार अधिकारियों और स्वास्थ्य निरीक्षकों पर कार्रवाई की गई। कुछ कर्मचारियों को निलंबित किया गया और नई पाइपलाइन बिछाने के आदेश दिए गए। प्रभावित इलाकों में मेडिकल कैंप लगाए गए और क्लोरीन की गोलियों का वितरण किया गया। साथ ही, लोगों को पानी उबालकर पीने की सख्त सलाह दी गई। इस घटना ने शहरी बुनियादी ढांचे के रखरखाव और पेयजल वितरण प्रणालियों की नियमित जांच की आवश्यकता पर एक बड़ा सवाल खड़ा किया है।