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INDIA Alliance News: सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर विचार

Tue, 19 Aug 2025 03:57 AM IST
सत्यम दुबे वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम

विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के नेताओं ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने पर विचार करने के लिए बैठक की। सूत्रों के मुताबिक, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के कक्ष में कई विपक्षी नेताओं ने बैठक की और इस बात पर चर्चा की कि कैसे मुख्य चुनाव आयुक्त ने रविवार को उनकी ओर से उठाए गए किसी भी सवाल का जवाब दिए बिना एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। कुछ विपक्षी सांसदों का मानना है कि इस लड़ाई को आगे बढ़ाया जाना चाहिए और उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने का सुझाव दिया। हालांकि, यह कदम चर्चा के चरण में है। विपक्षी दल फिर से मिलेंगे और इस पर आगे चर्चा करेंगे।

दरअसल, एक दिन पहले यानी रविवार को ही चुनाव आयोग ने एक बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इसमें सीईसी ज्ञानेश कुमार ने कहा था कि कुछ लोगों की तरफ से पीपीटी प्रेजेंटेशन में दिखाए आंकड़े चुनाव आयोग के नहीं हैं। उन्होंने साफ और स्पष्ट शब्दों में कहा था कि वोट चोरी के आरोपों पर हलफनामा दें या देश से माफी मांगे। तीसरा कोई विकल्प नहीं है। अगर सात दिन में हलफनामा नहीं मिला तो आरोपों को निराधार समझा जाएगा। 'वोट चोरी' के आरोपों के बीच विपक्षी दल संसद के मानसून सत्र में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव ला सकते हैं। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद सैयद नसीर हुसैन ने भी इस मुद्दे पर बात की और कहा कि पार्टी जरूरत पड़ने पर महाभियोग प्रस्ताव सहित सभी लोकतांत्रिक तरीकों का इस्तेमाल करने के लिए तैयार है। हालांकि, अभी तक इस पर कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई है।

हुसैन ने मीडिया को बताया कि अगर जरूरत पड़ी, तो हम नियमों के तहत लोकतंत्र की सभी शक्तियों का इस्तेमाल करेंगे। अभी तक हमने महाभियोग के बारे में कोई चर्चा नहीं की है, लेकिन जरूरत पड़ने पर हम कुछ भी कर सकते हैं। आपको बता दें कि विपक्ष संसद के दोनों सदनों में एसआईआर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहा है। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग की इस कवायद का उद्देश्य इस साल के अंत में होने वाले बिहार विधानसभा चुनावों से पहले मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करना है। वे दोनों सदनों में इस मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रहे हैं। 21 जुलाई को मानसून सत्र शुरू होने के बाद से ही दोनों सदनों में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा को छोड़कर संसद में बहुत कम कामकाज हुआ है। ज्यादातर एसआईआर मुद्दे पर ही सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित हुई है।

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