हिमाचल के चंबा जिले के चुराह में पंगोला नाला में मंगलवार को बादल फटने से नाले में बाढ़ से गडफरी व थल्ली पंचायतों को जोड़ने वाला संपर्क मार्ग बह गया। दो पंचायतों की लगभग तीन हजार आबादी का संपर्क जिला मुख्यालय चंबा से कट गया है। मंडी जिले के करसोग उपमंडल के कुटी गांव से 30 जून को बहे 41 वर्षीय ललित कुमार का शव 100 किलोमीटर दूर करला में सतलुज नदी से मिला। थुनाग से जरोल तक मार्ग अस्थायी रूप से बहाल होने से जंजैहली भी जुड़ गया है। आपदा से मंडी जिले में 19 लोगों की मौत हुई है, जबकि 52 लोग लापता हैं।
हमीरपुर में दो दिन पहले शुक्कर खड्ड में बह गई बिहार के दरभंगा की महिला का शव मिल गया। छह जुलाई को 30 वर्षीय किरण देवी पत्नी सुखराज, निवासी गांव मनकोली, तहसील सिंहबाड़ा, जिला दरभंगा बिहार खड्ड के किनारे बर्तन धोते समय बह गई थी।प्राकृतिक आपदा ने थुनाग क्षेत्र के लोगों के मन में डर बैठा दिया है। 30 जून को इतना ज्यादा नुकसान हुआ है कि मन विचलित हो उठता है। सोमवार रात को थुनाग और आसपास क्षेत्र में तेज बारिश शुरू हुई, जिससे लोग सहम गए। अधिवक्ता हुक्म सिंह ने बताया कि रात 10:34 बजे बारिश शुरू होते ही पहला हूटर बजा। 10 से 20 मिनट के अंतराल में दो और हूटर बजे। तेज बारिश और हूटर से इलाके में अफरातफरी मच गई। लोग डर के मारे सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे।
थुनाग निवासी सुरेंद्र पाल और बलवीर सिंह ने बताया कि वह खाना बना रहे थे, तभी हूटर बजा। डर के मारे उन्होंने कुकर और चावल गाड़ी में डाले और ढाई किलोमीटर दूर अपने मित्र भीम सिंह के घर बखलवार पहुंचे। प्रशासन ने पहले ही सूचित किया था कि हूटर लगातार पांच मिनट तक बजने पर ही सुरक्षित स्थानों पर जाना है, लेकिन आपदा की दहशत ने लोगों को बुरी तरह से तोड़ दिया है। रात एक बजे बारिश थमने पर लोगों ने राहत की सांस ली। जंजैहली बाजार और उसके साथ सटे क्षेत्रों में भी रात को लोग हूटर की आवाज सुनकर सहम उठे। एक बार फिर लोगों के मन में 30 जून और एक जुलाई वाला मंजर याद आ गया।