यूरोप में इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है और कई जगह तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है, जिससे सड़कें, ट्रेनें और अस्पताल तक प्रभावित हो रहे हैं। यूरोप में भीषण गर्मी ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। गर्मी के चलते अकेले फ्रांस में 1,000 से ज्यादा लोगों की जान चली गई है। जर्मनी और चेक गणराज्य में तापमान के रिकॉर्ड टूट गए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप है। यह वैश्विक औसत से दोगुनी रफ्तार से गर्म हो रहा है। उन्होंने बताया कि फिलहाल 15 करोड़ लोग भीषण गर्मी में रह रहे हैं। स्कूलों को बंद करना पड़ा है और बिजली ग्रिड फेल हो रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के बिना इतनी भीषण गर्मी और उमस मुमकिन नहीं थी। जर्मनी के नीसेमुंडे में तापमान 41.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।