सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने रविवार को दावा किया कि केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार के खिलाफ कोलकाता के थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने सिख समुदाय के एक व्यक्ति पर चप्पल फेंका, जो उसकी पगड़ी पर लगा। वहीं, विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन में केवल कागज के टुकड़े का इस्तेमाल किया गया था। कालीघाट थाने में यह प्राथमिकी 13 जून दर्ज की गई। प्राथमिकी में कहा गया है कि 12 जून राज्य भाजपा प्रमुख मजूमदार ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास के पास एक सार्वजनिक स्थान पर व्यक्ति पर चप्पल फेंका था। हालांकि एफआईआर पर केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा, "यह ममता बनर्जी का राजनीतिक रुख है। यह उनके निर्देश पर हुआ है। एक विरोध प्रदर्शन चल रहा था और पुलिस हमें हिरासत में ले रही थी। मैंने एक तख्ती फेंकी जिस पर चप्पल की तस्वीर थी। कोई भी यह नियंत्रित नहीं कर सकता कि यह कहां गिरेगी। जिस व्यक्ति के सिर पर यह लगी, उसने इस बारे में कोई शिकायत नहीं की है। उन्होंने उस दिन भी कहा था कि वे इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण देते हुए एक बयान देंगे। मैंने कहा कि इसकी जरूरत नहीं है। मैं यह सुनते हुए बड़ा हुआ हूं कि कैसे गुरु गोविंद सिंह के बेटों को जिंदा ईंटों में बंद कर दिया गया था टीएमसी में कोई भी सिख धर्म का उतना सम्मान नहीं करता जितना मैं करता हूं। वे वोट के लिए गुरुद्वारे जा सकते हैं... उन्हें राजनीति करने दें, वाहेगुरु सच्चाई जानते हैं भाजपा के राज्यसभा सांसद समिक भट्टाचार्य ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन में केवल कागज के टुकड़े का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने कहा, 'सिख लोगों का अपमान करने के लिए झूठी कहानी बनाई जा रही है।' उन्होंने कहा, 'मजूमदार और हमारे जैसे लोगों को गुरु तेग बहादुर और गुरु गोविंद सिंह के बलिदान के बारे में बचपन से सिखाया गया है।यह भाजपा नेताओं का सिख समुदाय के प्रति सम्मान दर्शाता है।' 12 जून को मजूमदार और अन्य नेताओं को महेशतला की ओर जाने के दौरान पुलिस ने रोका था, जिसके बाद उन्होंने कोलकाता के कालीघाट क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अक्सर चप्पल पहने नजर आती हैं। वहीं, मजूमदार ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, कल इसी पश्चिम बंगाल पुलिस को रबीन्द्रनगर में कट्टर जिहादियों के सामने सफेद कपड़े लहराने पड़े थे – बेबस, असहाय और अपमानित महसूस कर रही थी और आज अचानक ये योद्धा बन गए हैं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आदेशों का अंधभक्ति से पालन करते हुए, पूरी तरह गुलामी में डूबे हुए।